JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2020

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारत के संविधान के अनुसार, कोई व्यक्ति जो मतदान के लिए पात्र है, किसी राज्य में छह महीने के लिए मंत्री बनाया जा सकता है, भले ही वह उस राज्य के विधानमंडल का सदस्य न हो।

  2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार, आपराधिक अपराध में दोषसिद्ध और पाँच वर्ष के कारावास से दंडित व्यक्ति जेल से रिहा होने के बाद भी चुनाव लड़ने के लिए स्थायी रूप से निरर्ह होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

A.

केवल 1

B.

केवल 2

C.

1 और 2 दोनों

D.

न तो 1, न ही 2

Correct Answer: D

Detailed Solution

कथन 1 गलत है। केवल मतदाता होने की योग्यता किसी व्यक्ति को राज्य का मंत्री नियुक्त किए जाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अनुच्छेद 164(4) के अनुसार कोई व्यक्ति राज्य विधानमंडल का सदस्य न होते हुए मंत्री नियुक्त हो सकता है। लेकिन यदि वह लगातार छह महीने तक राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं बनता, तो छह महीने की समाप्ति पर उसका मंत्री पद समाप्त हो जाएगा।

इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई भी मतदाता मंत्री बन सकता है। संबंधित व्यक्ति में विधानमंडल का सदस्य बनने की योग्यता होनी चाहिए और वह निरर्ह नहीं होना चाहिए।

मतदाता और विधायक की योग्यता अलग है:

  • अनुच्छेद 326 के अनुसार मतदान की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है।

  • विधानसभा का सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।

  • विधान परिषद का सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 30 वर्ष है।

  • व्यक्ति भारत का नागरिक और विधि द्वारा निर्धारित अन्य योग्यताओं से युक्त होना चाहिए।

  • संविधान या कानून के अधीन निरर्ह व्यक्ति को छह महीने वाली व्यवस्था का उपयोग करके मंत्री नहीं बनाया जा सकता।

छह महीने की अवधि व्यक्ति को सदस्यता की योग्यता से छूट नहीं देती; यह केवल गैर-सदस्य मंत्री को विधानमंडल की सदस्यता प्राप्त करने का सीमित अवसर देती है।

कथन 2 गलत है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 दोषसिद्ध व्यक्ति को इस परिस्थिति में स्थायी रूप से निरर्ह नहीं करता।

धारा 8(3) के अनुसार किसी अपराध में कम-से-कम दो वर्ष के कारावास से दंडित व्यक्ति:

  • दोषसिद्धि की तारीख से निरर्ह हो जाता है।

  • कारावास से रिहा होने के बाद भी अगले छह वर्षों तक निरर्ह रहता है।

अतः पाँच वर्ष के कारावास से दंडित व्यक्ति की निरर्हता रिहाई के बाद सामान्यतः छह वर्षों तक जारी रहेगी, स्थायी रूप से नहीं।

धारा 8 में तीन प्रमुख प्रकार की व्यवस्था है:

  • धारा 8(1) में विशिष्ट अपराधों के आधार पर निरर्हता।

  • धारा 8(2) में कुछ अन्य निर्दिष्ट कानूनों के अंतर्गत अपराध।

  • धारा 8(3) में किसी अपराध में कम-से-कम दो वर्ष के कारावास पर सामान्य निरर्हता।

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