JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2022

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. संविधान का संशोधन करने वाले विधेयक के लिए भारत के राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश की आवश्यकता होती है।

  2. जब कोई संविधान संशोधन विधेयक भारत के राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो भारत के राष्ट्रपति के लिए उस पर अपनी अनुमति देना बाध्यकारी होता है।

  3. संविधान संशोधन विधेयक को लोक सभा और राज्य सभा दोनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित किया जाना चाहिए और इसके लिए संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A.

1 और 2

B.

2 और 3

C.

1 और 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: B

Detailed Solution

कथन 1 गलत है। संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक नहीं होती।

अनुच्छेद 368 के अनुसार:

  • संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • इसे लोकसभा या राज्यसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • इसे मंत्री अथवा निजी सदस्य प्रस्तुत कर सकता है।

  • इसे राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

  • इसके पुरःस्थापन के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक नहीं है।

कथन 2 सही है। अनुच्छेद 368(2) के अनुसार संसद द्वारा आवश्यक बहुमत से पारित और जहाँ आवश्यक हो वहाँ राज्यों द्वारा अनुसमर्थित संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने पर राष्ट्रपति को अपनी अनुमति देनी होती है।

इस संबंध में राष्ट्रपति:

  • अनुमति रोक नहीं सकता।

  • विधेयक को संसद के पुनर्विचार के लिए वापस नहीं कर सकता।

  • पॉकेट वीटो का प्रयोग नहीं कर सकता।

राष्ट्रपति को अनुमति देने के लिए बाध्य करने वाला प्रावधान संविधान (चौबीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1971 द्वारा स्पष्ट किया गया था।

कथन 3 सही है। संविधान संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित किया जाना आवश्यक है।

विशेष बहुमत में दो शर्तें एक साथ पूरी होनी चाहिए:

  • सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत।

  • उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई का बहुमत।

यदि एक सदन विधेयक को पारित कर देता है और दूसरा सदन अस्वीकार कर देता है अथवा पारित नहीं करता, तो विधेयक समाप्त हो जाता है। संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है।

संघीय प्रावधानों में संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत के अतिरिक्त कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों का अनुसमर्थन भी आवश्यक है। इनमें मुख्यतः शामिल हैं:

  • राष्ट्रपति का निर्वाचन।

  • संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार।

  • उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों से संबंधित निर्दिष्ट प्रावधान।

  • संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण।

  • सातवीं अनुसूची की सूचियाँ।

  • संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व।

  • अनुच्छेद 368।

आवश्यक संसदीय बहुमत और राज्य-अनुसमर्थन के बाद राष्ट्रपति की अनुमति मिलने पर संविधान संशोधित हो जाता है।

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