Previous Year Question
लोक सभा के उपाध्यक्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
लोक सभा में प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के अनुसार, उपाध्यक्ष का निर्वाचन उस तारीख को होगा जो अध्यक्ष नियत करे।
ऐसा अनिवार्य उपबंध है कि लोक सभा के उपाध्यक्ष के रूप में किसी उम्मीदवार का निर्वाचन या तो मुख्य विपक्षी दल से अथवा सत्तारूढ़ दल से होगा।
सदन की बैठक की अध्यक्षता करते समय उपाध्यक्ष की शक्ति अध्यक्ष के समान होती है और उसके विनिर्णयों के विरुद्ध कोई अपील नहीं होती।
उपाध्यक्ष की नियुक्ति के संबंध में सुस्थापित संसदीय पद्धति यह है कि प्रस्ताव अध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत किया जाता है और प्रधानमंत्री द्वारा विधिवत् समर्थित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
1 और 3
1, 2 और 3
3 और 4
2 और 4
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन 1 सही है। लोकसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के नियम 8 के अनुसार उपाध्यक्ष का निर्वाचन उस तारीख को आयोजित किया जाता है जो लोकसभा अध्यक्ष निर्धारित करता है।
संविधान का अनुच्छेद 93 लोकसभा को यथाशीघ्र अपने दो सदस्यों को क्रमशः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनने का निर्देश देता है। संविधान उपाध्यक्ष के निर्वाचन के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं करता।
कथन 2 गलत है। संविधान अथवा लोकसभा के नियमों में ऐसा कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है कि उपाध्यक्ष सत्तारूढ़ दल या मुख्य विपक्षी दल से ही होना चाहिए।
उपाध्यक्ष का पद विपक्ष के सदस्य को देने की संसदीय परंपरा रही है, लेकिन यह कानूनी अथवा संवैधानिक बाध्यता नहीं है।
कथन 3 सही है। सदन की अध्यक्षता करते समय उपाध्यक्ष को अध्यक्ष के समान शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। वह सदन की कार्यवाही संचालित करता है, व्यवस्था बनाए रखता है और प्रक्रिया संबंधी प्रश्नों पर निर्णय देता है। पीठासीन अधिकारी के रूप में दिए गए उसके निर्णयों के विरुद्ध सदन में अपील की व्यवस्था नहीं होती।
अनुच्छेद 95 के अनुसार:
अध्यक्ष का पद रिक्त होने पर उपाध्यक्ष अध्यक्ष के कर्तव्यों का पालन करता है।
अध्यक्ष के अनुपस्थित रहने पर उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करता है।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों की अनुपस्थिति में नियमों द्वारा निर्धारित व्यक्ति पीठासीन होता है।
कथन 4 गलत है। उपाध्यक्ष के निर्वाचन का प्रस्ताव अध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत और प्रधानमंत्री द्वारा अनिवार्य रूप से समर्थित किए जाने की कोई संसदीय पद्धति नहीं है। नियत तारीख पर लोकसभा का कोई सदस्य किसी अन्य सदस्य को उपाध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है और उस प्रस्ताव का किसी दूसरे सदस्य द्वारा समर्थन किया जाता है।
लोकसभा उपाध्यक्ष से संबंधित अन्य तथ्य:
वह लोकसभा के सदस्यों में से चुना जाता है।
उपाध्यक्ष अपना त्यागपत्र अध्यक्ष को देता है।
अनुच्छेद 94 के अनुसार उसे लोकसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है।
हटाने का संकल्प प्रस्तुत करने से कम-से-कम 14 दिन पहले सूचना देना आवश्यक है।
उपाध्यक्ष पीठासीन होने पर सामान्यतः प्रथम मत नहीं देता, लेकिन मत बराबर होने पर निर्णायक मत दे सकता है।