Previous Year Question
भारतीय संसद में वित्त विधेयक और धन विधेयक के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
जब लोक सभा वित्त विधेयक को राज्य सभा को भेजती है, तो राज्य सभा विधेयक को संशोधित या अस्वीकार कर सकती है।
जब लोक सभा धन विधेयक को राज्य सभा को भेजती है, तो राज्य सभा इसे संशोधित या अस्वीकार नहीं कर सकती, वह केवल सिफारिशें कर सकती है।
लोक सभा और राज्य सभा के बीच असहमति होने की स्थिति में धन विधेयक के लिए कोई संयुक्त बैठक नहीं होती, किंतु वित्त विधेयक के लिए संयुक्त बैठक आवश्यक हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
कोई नहीं
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 सही है। वित्तीय विधेयक, जो धन विधेयक नहीं है, सामान्य विधेयक की संसदीय प्रक्रिया के अधीन होता है। इसलिए राज्यसभा उसे संशोधित या अस्वीकार कर सकती है।
संविधान में वित्तीय विधेयकों की दो प्रमुख श्रेणियाँ हैं:
अनुच्छेद 117(1) का वित्तीय विधेयक: इसमें अनुच्छेद 110 के एक या अधिक विषयों के साथ अन्य सामान्य विषय भी होते हैं। इसे केवल लोकसभा में राष्ट्रपति की सिफारिश पर प्रस्तुत किया जा सकता है, लेकिन राज्यसभा इसे संशोधित या अस्वीकार कर सकती है।
अनुच्छेद 117(3) का वित्तीय विधेयक: इसमें भारत की संचित निधि से व्यय का प्रावधान होता है, लेकिन अनुच्छेद 110 का कोई विषय शामिल नहीं होता। इसे किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है, किंतु राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना पारित नहीं किया जा सकता।
कथन 2 सही है। अनुच्छेद 109 के अनुसार राज्यसभा धन विधेयक को संशोधित अथवा अस्वीकार नहीं कर सकती। वह केवल सिफारिशें कर सकती है।
राज्यसभा को धन विधेयक 14 दिनों के भीतर लोकसभा को लौटाना होता है।
लोकसभा राज्यसभा की सभी, कुछ अथवा किसी भी सिफारिश को स्वीकार न करने के लिए स्वतंत्र है।
14 दिनों में विधेयक वापस न आने पर वह दोनों सदनों से लोकसभा द्वारा पारित रूप में पारित माना जाता है।
कथन 3 गलत है। धन विधेयक के संबंध में संयुक्त बैठक नहीं हो सकती—इस कथन का पहला भाग सही है। लेकिन वित्तीय विधेयक पर असहमति होने से संयुक्त बैठक स्वतः आवश्यक नहीं हो जाती।
अनुच्छेद 108 के अनुसार निर्धारित गतिरोध उत्पन्न होने पर राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाने के अपने आशय की सूचना दे सकता है। अतः संयुक्त बैठक एक उपलब्ध संवैधानिक उपाय है, अनिवार्य या स्वतः होने वाली प्रक्रिया नहीं।
धन विधेयक और वित्तीय विधेयक में मुख्य अंतर:
धन विधेयक की परिभाषा अनुच्छेद 110 में है।
कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष करता है।
धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है; वित्तीय विधेयक की श्रेणी के अनुसार प्रस्तुति की प्रक्रिया अलग हो सकती है।
धन विधेयक पर राज्यसभा केवल सिफारिश कर सकती है; वित्तीय विधेयक पर सामान्यतः उसे पूर्ण विधायी शक्ति प्राप्त होती है।
धन विधेयक पर संयुक्त बैठक नहीं होती; धन विधेयक न होने वाले वित्तीय विधेयक के लिए अनुच्छेद 108 के अधीन संयुक्त बैठक संभव है।