Previous Year Question
लोक सभा के अध्यक्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
जब लोक सभा के अध्यक्ष को हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है, तब
वह पीठासीन नहीं होगा/होगी।
उसे बोलने का अधिकार नहीं होगा।
वह संकल्प पर प्रथमतः मत देने का हकदार नहीं होगा/होगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
केवल 1
1 और 2
2 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन 1 सही है। अनुच्छेद 96(1) के अनुसार जब लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने का संकल्प विचाराधीन हो, तब अध्यक्ष सदन की बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकता।
ऐसी स्थिति में अनुच्छेद 95 के प्रावधानों के अनुसार उपाध्यक्ष अथवा सदन द्वारा निर्धारित अन्य व्यक्ति पीठासीन होता है।
कथन 2 गलत है। अनुच्छेद 96(2) अध्यक्ष को हटाने के संकल्प पर सदन में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का स्पष्ट अधिकार देता है। अध्यक्ष अपने विरुद्ध लगाए गए आरोपों का उत्तर दे सकता है।
कथन 3 गलत है। ऐसी कार्यवाही में अध्यक्ष को प्रथमतः मत देने का अधिकार होता है। लेकिन मत बराबर होने की स्थिति में वह निर्णायक मत नहीं दे सकता।
यह अध्यक्ष के सामान्य मतदान अधिकार से अलग है:
सामान्य कार्यवाही में अध्यक्ष प्रथमतः मत नहीं देता।
मत बराबर होने पर वह निर्णायक मत देता है।
अपने पद से हटाने का संकल्प विचाराधीन होने पर वह प्रथमतः मत दे सकता है।
ऐसी कार्यवाही में मत बराबर होने पर उसे निर्णायक मत का अधिकार नहीं होता।
लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने से संबंधित अन्य तथ्य:
अनुच्छेद 94(c) के अनुसार अध्यक्ष को लोकसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है।
संकल्प प्रस्तुत करने के आशय की कम-से-कम 14 दिन पूर्व सूचना देना आवश्यक है।
लोकसभा के विघटन के बाद भी अध्यक्ष नई लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पहले तक अपने पद पर बना रहता है।