Previous Year Question
भारतीय संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
लोक सभा में लंबित कोई विधेयक उसके विघटन पर व्यपगत हो जाता है।
लोक सभा द्वारा पारित और राज्य सभा में लंबित कोई विधेयक लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है।
कोई विधेयक, जिसके संबंध में भारत के राष्ट्रपति ने सदनों को संयुक्त बैठक के लिए आहूत करने के अपने आशय की सूचना दी है, लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
केवल 1
1 और 2
2 और 3
केवल 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 सही है। अनुच्छेद 107(5) के अनुसार लोकसभा में लंबित कोई विधेयक लोकसभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है। नई लोकसभा के गठन के बाद सरकार उस विषय पर आगे बढ़ना चाहे तो नया विधेयक प्रस्तुत करना पड़ता है।
कथन 2 सही है। लोकसभा द्वारा पारित लेकिन राज्यसभा में लंबित विधेयक भी लोकसभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है। इसका कारण यह है कि जिस लोकसभा ने विधेयक पारित किया था, उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
कथन 3 गलत है। अनुच्छेद 108(5) के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के आशय की सूचना दिए जाने के बाद लोकसभा का विघटन हो जाए, तब भी उस विधेयक पर संयुक्त बैठक आयोजित की जा सकती है। अतः ऐसा विधेयक लोकसभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता।
लोकसभा के विघटन पर विधेयकों की स्थिति:
लोकसभा में लंबित विधेयक—व्यपगत।
लोकसभा से पारित और राज्यसभा में लंबित विधेयक—व्यपगत।
राज्यसभा में लंबित लेकिन लोकसभा द्वारा अभी पारित नहीं किया गया विधेयक—व्यपगत नहीं।
दोनों सदनों से पारित और राष्ट्रपति की अनुमति के लिए लंबित विधेयक—व्यपगत नहीं।
राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार के लिए लौटाया गया और संसद में लंबित विधेयक—व्यपगत नहीं।
संयुक्त बैठक बुलाने के राष्ट्रपति के आशय की सूचना के बाद लंबित विधेयक—व्यपगत नहीं।
अनुच्छेद 107(3) यह भी स्पष्ट करता है कि संसद के सदनों के सत्रावसान से कोई लंबित विधेयक व्यपगत नहीं होता। विधेयक का व्यपगत होना लोकसभा के विघटन से संबंधित है, केवल सत्रावसान से नहीं।
धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक की व्यवस्था लागू नहीं होती।