Previous Year Question
लोक सभा की आचार समिति के विषय में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
प्रारंभ में यह एक तदर्थ समिति थी।
केवल लोक सभा का कोई सदस्य ही लोक सभा के किसी सदस्य के अनैतिक आचरण से संबंधित शिकायत कर सकता है।
यह समिति किसी ऐसे मामले पर विचार नहीं कर सकती जो न्यायाधीन है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए:
1 और 2
2 और 3
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: C
Detailed Solution
कथन 1 सही है। लोकसभा की आचार समिति प्रारंभ में एक तदर्थ समिति थी। इसे वर्ष 2000 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जी. एम. सी. बालयोगी ने गठित किया था। बाद में वर्ष 2015 में इसे लोकसभा की स्थायी समिति का दर्जा दिया गया।
समिति में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित 15 सदस्य होते हैं। समिति के प्रमुख कार्य हैं:
लोकसभा सदस्यों के अनैतिक आचरण से संबंधित शिकायतों की जाँच करना।
सदस्यों के नैतिक और सदाचारपूर्ण व्यवहार से संबंधित मामलों पर विचार करना।
सदस्यों के लिए आचार संहिता तैयार करना।
जाँच के बाद लोकसभा को उचित कार्रवाई की सिफारिश करना।
कथन 2 गलत है। शिकायत केवल लोकसभा सदस्य ही नहीं कर सकता। कोई अन्य व्यक्ति भी लोकसभा सदस्य के अनैतिक आचरण के संबंध में शिकायत कर सकता है, लेकिन ऐसी शिकायत को लोकसभा के किसी सदस्य के माध्यम से अग्रेषित किया जाना आवश्यक है।
अतः अंतर यह है कि:
लोकसभा सदस्य सीधे शिकायत कर सकता है।
कोई बाहरी व्यक्ति भी शिकायत कर सकता है, परंतु उसे लोकसभा सदस्य के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा।
इसलिए कथन में प्रयुक्त शब्द “केवल” इसे गलत बनाता है।
कथन 3 सही है। आचार समिति किसी ऐसे विषय को विचारार्थ ग्रहण नहीं करती जो किसी न्यायालय के समक्ष न्यायाधीन हो। इसका उद्देश्य संसदीय जाँच और न्यायिक प्रक्रिया के बीच हस्तक्षेप अथवा टकराव से बचना है।
आचार समिति को विशेषाधिकार समिति से अलग समझना चाहिए:
आचार समिति सदस्य के अनैतिक व्यवहार और आचार संहिता से संबंधित मामलों की जाँच करती है।
विशेषाधिकार समिति सदन, उसकी समितियों अथवा सदस्यों के विशेषाधिकारों के उल्लंघन और सदन की अवमानना से संबंधित मामलों की जाँच करती है।