Previous Year Question
भारतीय राज्यव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. कोई अध्यादेश किसी केंद्रीय अधिनियम में संशोधन कर सकता है।
II. कोई अध्यादेश किसी मूल अधिकार को न्यून कर सकता है।
III. कोई अध्यादेश पिछली तारीख से प्रवर्तन में आ सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
केवल I और II
केवल II और III
केवल I और III
I, II और III
Correct Answer: C
Detailed Solution
राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति का उल्लेख अनुच्छेद 123 में है। संसद के दोनों सदन सत्र में न होने और तत्काल कार्रवाई आवश्यक होने पर राष्ट्रपति अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है।
कथन I सही है। अध्यादेश को संसद के अधिनियम के समान शक्ति और प्रभाव प्राप्त होता है। इसलिए अध्यादेश संसद की विधायी क्षमता के भीतर किसी केंद्रीय अधिनियम में संशोधन अथवा उसका निरसन कर सकता है।
लेकिन अध्यादेश द्वारा संविधान में संशोधन नहीं किया जा सकता, क्योंकि संविधान संशोधन के लिए अनुच्छेद 368 में विधेयक और विशेष बहुमत की अलग प्रक्रिया निर्धारित है।
कथन II गलत है। अनुच्छेद 13(3) में ‘विधि’ की परिभाषा में अध्यादेश को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अनुच्छेद 13(2) राज्य को ऐसी विधि बनाने से रोकता है जो मौलिक अधिकारों को छीनती अथवा न्यून करती हो। ऐसी विधि उल्लंघन की सीमा तक शून्य होगी।
इसलिए अध्यादेश भी:
मौलिक अधिकारों के अधीन है।
संवैधानिक न्यायिक पुनर्विलोकन के अधीन है।
संसद के अधिनियम की तरह संवैधानिक सीमाओं से बंधा है।
कथन III सही है। संसद के अधिनियम की तरह अध्यादेश को भी पिछली तारीख से प्रभावी बनाया जा सकता है। परंतु उसका भूतलक्षी प्रयोग संवैधानिक सीमाओं के अधीन होगा। उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 20(1) के कारण अध्यादेश पिछली तारीख से किसी कार्य को अपराध घोषित नहीं कर सकता और न ही अपराध किए जाने के समय लागू दंड से अधिक दंड लगा सकता है।
अध्यादेश से संबंधित अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य:
अध्यादेश राष्ट्रपति द्वारा संघ की मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर जारी किया जाता है।
इसे संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखना आवश्यक है।
संसद के पुनः समवेत होने से छह सप्ताह बाद यह समाप्त हो जाता है, यदि उससे पहले इसे कानून में परिवर्तित नहीं किया गया हो।
दोनों सदन अलग-अलग तारीखों पर पुनः समवेत हों तो छह सप्ताह की गणना बाद वाली तारीख से होती है।
राष्ट्रपति इसे किसी भी समय वापस ले सकता है।
संसद ऐसे अध्यादेश को पहले भी अस्वीकार कर सकती है।