Previous Year Question
भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. राष्ट्रपति द्वारा इस शक्ति के प्रयोग को सीमित न्यायिक पुनर्विलोकन के अधीन किया जा सकता है।
II. राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग केन्द्र सरकार की सलाह के बिना कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
केवल I
केवल II
I और II दोनों
न तो I, न ही II
Correct Answer: A
Detailed Solution
राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 72 में किया गया है।
कथन I सही है। राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति व्यापक अवश्य है, लेकिन पूर्णतः निरंकुश नहीं है। इसके प्रयोग की सीमित आधारों पर न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
न्यायालय क्षमादान के निर्णय की पुनः गुण-दोष के आधार पर अपील की तरह जाँच नहीं करता। फिर भी हस्तक्षेप किया जा सकता है, यदि निर्णय:
दुर्भावना से प्रेरित हो।
पूर्णतः मनमाना या भेदभावपूर्ण हो।
अप्रासंगिक अथवा असंगत विचारों पर आधारित हो।
प्रासंगिक तथ्यों की उपेक्षा करके लिया गया हो।
विवेक का प्रयोग किए बिना लिया गया हो।
कथन II गलत है। अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के अनुसार कार्य करना होता है। इसलिए राष्ट्रपति अनुच्छेद 72 की शक्ति का प्रयोग केन्द्र सरकार की सलाह से स्वतंत्र होकर नहीं कर सकता।
राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है, लेकिन पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह के अनुसार कार्य करना उसके लिए अनिवार्य है।
अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति निम्नलिखित मामलों में दंड को क्षमा, स्थगित, विरामित या परिहार कर सकता है अथवा दंडादेश को निलंबित, परिहारित या लघुकृत कर सकता है:
सेना न्यायालय द्वारा दिए गए दंड के मामले।
संघ की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत आने वाले विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध अपराध।
मृत्युदंड के सभी मामले।
क्षमादान के विभिन्न रूप हैं:
Pardon: दोषसिद्धि और दंड दोनों के प्रभाव को समाप्त करना।
Commutation: दंड को कम कठोर प्रकार के दंड में बदलना।
Remission: दंड की प्रकृति बदले बिना उसकी अवधि कम करना।
Respite: विशेष परिस्थितियों के कारण कम दंड देना।
Reprieve: दंड, विशेष रूप से मृत्युदंड, के निष्पादन को अस्थायी रूप से रोकना।