Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय संघवाद की विशेषता नहीं है?
भारत में स्वतंत्र न्यायपालिका है।
केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है।
संघटक इकाइयों को राज्यसभा में असमान प्रतिनिधित्व दिया गया है।
यह संघटक इकाइयों के बीच हुए समझौते का परिणाम है।
Correct Answer: D
Detailed Solution
भारतीय संघवाद स्वतंत्र राज्यों अथवा संघटक इकाइयों के बीच हुए किसी समझौते का परिणाम नहीं है। संविधान सभा ने एकीकृत राजनीतिक व्यवस्था के रूप में भारत का संघ गठित किया था।
अनुच्छेद 1 भारत को “राज्यों का संघ” घोषित करता है। भारतीय राज्यों को संघ से पृथक होने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
विकल्प (a) भारतीय संघवाद की विशेषता है
संघीय व्यवस्था में स्वतंत्र न्यायपालिका आवश्यक है, क्योंकि वह:
संविधान की सर्वोच्चता की रक्षा करती है।
केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति-विभाजन की व्याख्या करती है।
केंद्र-राज्य तथा अंतर्राज्यीय विवादों का निर्णय करती है।
विधायिका और कार्यपालिका की असंवैधानिक कार्रवाइयों का न्यायिक पुनर्विलोकन करती है।
अनुच्छेद 131 सर्वोच्च न्यायालय को केंद्र और राज्यों अथवा राज्यों के बीच कुछ विवादों में आरंभिक अधिकारिता देता है।
विकल्प (b) भारतीय संघवाद की विशेषता है
संविधान ने केंद्र और राज्यों की विधायी शक्तियों का वितरण किया है।
अनुच्छेद 245–246 विधायी शक्तियों की सीमा एवं वितरण से संबंधित हैं।
सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची दी गई हैं।
संघ सूची पर सामान्यतः संसद कानून बनाती है।
राज्य सूची पर सामान्यतः राज्य विधानमंडल कानून बनाते हैं।
समवर्ती सूची पर संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं।
विकल्प (c) भारतीय संघवाद की विशेषता है
राज्यसभा में राज्यों को समान प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। चौथी अनुसूची के अंतर्गत उनका प्रतिनिधित्व मुख्यतः जनसंख्या के आधार पर अलग-अलग है।
इसलिए उत्तर प्रदेश जैसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य को छोटे राज्यों की तुलना में अधिक सीटें प्राप्त हैं। यह संयुक्त राज्य अमेरिका से भिन्न है, जहाँ प्रत्येक राज्य को सीनेट में समान प्रतिनिधित्व मिलता है।
विकल्प (d) भारतीय संघवाद की विशेषता नहीं है
भारत का संघ राज्यों के बीच हुए समझौते से निर्मित नहीं हुआ। इसके अतिरिक्त:
किसी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।
अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद नए राज्य बना सकती है।
संसद किसी राज्य का क्षेत्र, सीमा या नाम बदल सकती है।
संबंधित राज्य विधानमंडल से उसके विचार माँगे जाते हैं, लेकिन उसकी सहमति संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होती।
भारतीय संघवाद की प्रमुख विशेषताएँ
संघ और राज्य स्तर पर दोहरी शासन-व्यवस्था।
लिखित एवं सर्वोच्च संविधान।
केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक वितरण।
स्वतंत्र न्यायपालिका।
द्विसदनीय संघीय विधायिका।
संविधान के कुछ संघीय प्रावधानों के संशोधन के लिए कम-से-कम आधे राज्यों की पुष्टि।
राज्यसभा में राज्यों का प्रतिनिधित्व।