JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2021

Previous Year Question

भारतीय राज्य-व्यवस्था में निम्नलिखित में से कौन-सी एक अनिवार्य विशेषता है, जो यह दर्शाती है कि उसका स्वरूप संघीय है?

A.

न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुरक्षित है।

B.

संघ विधायिका में संघटक इकाइयों से निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं।

C.

संघ मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय दलों के निर्वाचित प्रतिनिधि हो सकते हैं।

D.

मूल अधिकार न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं।

Correct Answer: A

Detailed Solution

संघीय व्यवस्था में संविधान केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करता है। इस विभाजन की रक्षा करने, संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखने और केंद्र-राज्य विवादों का निष्पक्ष निर्णय करने के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका अनिवार्य है।

इसलिए विकल्प (a) भारतीय राज्य-व्यवस्था के संघीय स्वरूप को दर्शाने वाली आवश्यक विशेषता है।

स्वतंत्र न्यायपालिका का संघवाद से संबंध

संघीय व्यवस्था में केंद्र और राज्यों को संविधान द्वारा निर्धारित क्षेत्रों में शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। यदि किसी स्तर की सरकार अपने संवैधानिक अधिकार-क्षेत्र से बाहर जाती है, तो स्वतंत्र न्यायपालिका उसके कानून या कार्रवाई की संवैधानिकता की जाँच कर सकती है।

इसके प्रमुख संवैधानिक आधार हैं:

  • अनुच्छेद 131: केंद्र और राज्यों अथवा राज्यों के बीच कुछ विवादों में सर्वोच्च न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता।

  • अनुच्छेद 245–246: संसद और राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्तियों का वितरण।

  • सातवीं अनुसूची: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।

  • अनुच्छेद 32 और 226: संवैधानिक उपचार तथा न्यायिक पुनर्विलोकन की व्यवस्था।

  • अनुच्छेद 124–147: सर्वोच्च न्यायालय की संरचना, अधिकारिता और स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधान।

  • अनुच्छेद 214: प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय की व्यवस्था।

न्यायाधीशों की पद-सुरक्षा, कठिन पदच्युति प्रक्रिया और वेतन को संचित निधि पर भारित करना न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले उपाय हैं।

अन्य विकल्प क्यों निर्णायक नहीं हैं?

विकल्प (b): संघटक इकाइयों के निर्वाचित प्रतिनिधि

राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है और संघीय व्यवस्था की महत्त्वपूर्ण विशेषता है। फिर भी केवल संघटक इकाइयों से निर्वाचित प्रतिनिधियों का होना संघीय स्वरूप की अनिवार्य और निर्णायक कसौटी नहीं है। ऐसी प्रतिनिधिक व्यवस्थाएँ गैर-संघीय प्रणालियों में भी हो सकती हैं।

विकल्प (c): क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधि

संघ मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय दलों के सदस्यों का होना राजनीतिक परिस्थितियों या गठबंधन सरकार पर निर्भर करता है। यह संविधान द्वारा निर्धारित संघीय अनिवार्यता नहीं है।

विकल्प (d): मूल अधिकारों की न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीयता

मूल अधिकारों का न्यायिक प्रवर्तन संविधानवाद और विधि के शासन की विशेषता है। यह केवल संघीय व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है; एकात्मक व्यवस्था में भी प्रवर्तनीय मूल अधिकार हो सकते हैं।

भारतीय संघवाद के प्रमुख लक्षण

  • दोहरी शासन-व्यवस्था—संघ और राज्य।

  • लिखित एवं सर्वोच्च संविधान।

  • केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन।

  • संविधान के कुछ प्रावधानों के संशोधन के लिए राज्यों की स्वीकृति।

  • स्वतंत्र न्यायपालिका।

  • द्विसदनीय संघ विधायिका।

  • संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को “राज्यों का संघ” कहा गया है।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.