Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सा/से भारतीय संविधान में निर्धारित नागरिकों का/के मूल कर्तव्य है/हैं?
हमारी सामासिक संस्कृति की समृद्ध विरासत को संरक्षित करना।
सामाजिक अन्याय से दुर्बल वर्गों की रक्षा करना।
वैज्ञानिक मनोदशा और अन्वेषण की भावना का विकास करना।
व्यक्तिगत और सामूहिक कार्यकलापों के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
केवल 1 और 2
केवल 2
केवल 1, 3 और 4
उपर्युक्त सभी
Correct Answer: C
Detailed Solution
भारतीय नागरिकों के मूल कर्तव्य संविधान के भाग IVA के अनुच्छेद 51A में दिए गए हैं।
कथन 1 सही है। अनुच्छेद 51A(f) के अनुसार प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह भारत की सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्त्व समझे और उसका परिरक्षण करे।
‘सामासिक संस्कृति’ से आशय भारत की विभिन्न भाषायी, धार्मिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक परंपराओं से विकसित साझा सभ्यतागत विरासत से है।
कथन 2 गलत है। दुर्बल वर्गों को सामाजिक अन्याय और शोषण से बचाना नागरिकों का मूल कर्तव्य नहीं है। यह अनुच्छेद 46 के अंतर्गत राज्य की नीति का निदेशक तत्त्व है।
अनुच्छेद 46 राज्य को जनता के दुर्बल वर्गों, विशेषतः अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करने तथा उन्हें सामाजिक अन्याय और सभी प्रकार के शोषण से बचाने का निर्देश देता है।
कथन 3 सही है। अनुच्छेद 51A(h) प्रत्येक नागरिक को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद तथा ज्ञानार्जन और सुधार की भावना विकसित करने का कर्तव्य देता है।
इसमें तर्क, प्रमाण, जिज्ञासा, प्रश्न करने की प्रवृत्ति, अंधविश्वास से मुक्ति और सामाजिक सुधार की भावना सम्मिलित है।
कथन 4 सही है। अनुच्छेद 51A(j) के अनुसार प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे, जिससे राष्ट्र निरंतर उच्चतर उपलब्धियाँ प्राप्त करे।
मूल कर्तव्यों से संबंधित तथ्य:
इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया।
प्रारंभ में दस मूल कर्तव्य थे।
86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा अनुच्छेद 51A(k) के रूप में ग्यारहवाँ कर्तव्य जोड़ा गया।
ये केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं।
ये सीधे न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन संसद संबंधित विषयों पर कानून बना सकती है।
न्यायालय कानूनों की व्याख्या और संवैधानिकता की जाँच करते समय मूल कर्तव्यों को ध्यान में रख सकते हैं।