Previous Year Question
भारतीय संविधान में राज्य की नीति के निदेशक तत्त्वों के अंतर्गत निम्नलिखित उपबंधों पर विचार कीजिए:
भारत के नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करना।
ग्राम पंचायतों को संगठित करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना।
सभी कर्मकारों के लिए युक्तियुक्त अवकाश और सांस्कृतिक अवसर सुनिश्चित करना।
उपर्युक्त में से कौन-से गांधीवादी सिद्धांत हैं जो राज्य की नीति के निदेशक तत्त्वों में प्रतिबिंबित होते हैं?
केवल 1, 2 और 4
केवल 2 और 3
केवल 1, 3 और 4
उपर्युक्त सभी
Correct Answer: B
Detailed Solution
राज्य की नीति के निदेशक तत्त्वों को उनके उद्देश्य और वैचारिक आधार के अनुसार सामान्यतः समाजवादी, गांधीवादी तथा उदार-बौद्धिक सिद्धांतों में वर्गीकृत किया जाता है। यह वर्गीकरण संविधान में औपचारिक रूप से नहीं दिया गया है, बल्कि अध्ययन की सुविधा के लिए किया जाता है।
कथन 1 गांधीवादी नहीं है। नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता का प्रावधान अनुच्छेद 44 में है। इसे सामान्यतः उदार-बौद्धिक निदेशक तत्त्व माना जाता है। इसका उद्देश्य विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे नागरिक विषयों में समान विधिक व्यवस्था की दिशा में प्रयास करना है।
कथन 2 गांधीवादी है। अनुच्छेद 40 राज्य को ग्राम पंचायतों का संगठन करने और उन्हें स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक शक्तियाँ प्रदान करने का निर्देश देता है।
यह गांधीजी की ग्राम स्वराज की अवधारणा से संबंधित है, जिसमें शासन का विकेंद्रीकरण और आत्मनिर्भर ग्राम समुदाय प्रमुख हैं। 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा भाग IX जोड़कर पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
कथन 3 गांधीवादी है। अनुच्छेद 43 राज्य को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत अथवा सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने का निर्देश देता है। इसका संबंध ग्रामोद्योग, स्थानीय उत्पादन, रोजगार और ग्रामीण आत्मनिर्भरता से है।
कथन 4 गांधीवादी नहीं है। सभी कर्मकारों के लिए अवकाश तथा सामाजिक और सांस्कृतिक अवसरों सहित सम्मानजनक जीवन स्तर का प्रावधान भी अनुच्छेद 43 में है, लेकिन इस हिस्से को सामान्यतः समाजवादी निदेशक तत्त्वों में वर्गीकृत किया जाता है। इसका लक्ष्य श्रमिक कल्याण और सामाजिक-आर्थिक न्याय है।
प्रमुख गांधीवादी निदेशक तत्त्व माने जाते हैं:
अनुच्छेद 40—ग्राम पंचायतों का संगठन।
अनुच्छेद 43—ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा।
अनुच्छेद 46—दुर्बल वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के हितों की अभिवृद्धि।
अनुच्छेद 47—मादक पेयों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक औषधियों के सेवन का निषेध करने का प्रयास।
अनुच्छेद 48—कृषि और पशुपालन का संगठन तथा गायों, बछड़ों और दुधारू एवं वाहक पशुओं की नस्लों का संरक्षण।