Previous Year Question
भारत में मत देने का अधिकार और निर्वाचित होने का अधिकार है
मूल अधिकार
नैसर्गिक अधिकार
संवैधानिक अधिकार
विधिक अधिकार
Correct Answer: C
Detailed Solution
इस प्रश्न में UPSC का अभिप्रेत उत्तर संवैधानिक अधिकार है, क्योंकि भारत की निर्वाचन व्यवस्था और सार्वभौम वयस्क मताधिकार का मूल आधार संविधान में निहित है। हालाँकि मतदान करने और चुनाव लड़ने की वास्तविक प्रक्रिया संसद द्वारा निर्मित निर्वाचन कानूनों से विनियमित होती है।
प्रमुख संवैधानिक प्रावधान हैं:
अनुच्छेद 324: संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचनों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण निर्वाचन आयोग में निहित करता है।
अनुच्छेद 325: प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक सामान्य निर्वाचक नामावली का प्रावधान करता है और केवल धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर नामावली से बाहर रखने का निषेध करता है।
अनुच्छेद 326: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर कराने का प्रावधान करता है। मतदान की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है।
अनुच्छेद 84 और 173: क्रमशः संसद और राज्य विधानमंडलों की सदस्यता की संवैधानिक अर्हताओं से संबंधित हैं।
अनुच्छेद 102 और 191: संसद और राज्य विधानमंडलों की सदस्यता की निरर्हताओं से संबंधित हैं।
निर्वाचन अधिकारों का प्रयोग निम्न कानूनों द्वारा विस्तार से विनियमित होता है:
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950: निर्वाचक नामावलियों, मतदाता-पंजीकरण और निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित प्रावधान करता है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951: चुनाव संचालन, मतदान का अधिकार, उम्मीदवारों की अर्हता-निरर्हता, भ्रष्ट आचरण और निर्वाचन विवादों से संबंधित है।
इस अधिनियम की धारा 62 निर्वाचक नामावली में पंजीकृत व्यक्ति के मतदान के अधिकार और उस पर लागू प्रतिबंधों को विनियमित करती है।
महत्त्वपूर्ण न्यायिक सूक्ष्मता: सर्वोच्च न्यायालय के अनेक निर्णयों में चुनाव करने और निर्वाचित होने के अधिकार को विधि द्वारा निर्मित या वैधानिक अधिकार भी कहा गया है। इसका अर्थ है कि संविधान निर्वाचन व्यवस्था का आधार प्रदान करता है, लेकिन कौन मतदान कर सकता है, कौन प्रत्याशी बन सकता है तथा इन अधिकारों का प्रयोग कैसे होगा—यह निर्वाचन कानूनों द्वारा निर्धारित होता है।
इसी प्रकार मतदान का अधिकार और मतदाता द्वारा अपना चयन व्यक्त करने की स्वतंत्रता अलग अवधारणाएँ हैं। मतदान का वास्तविक अधिकार निर्वाचन कानून से विनियमित होता है, जबकि मतदाता द्वारा स्वतंत्रतापूर्वक अपनी पसंद व्यक्त करना अनुच्छेद 19(1)(a) की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा है।
यह मूल अधिकार नहीं है, क्योंकि इसे संविधान के भाग III में मूल अधिकार के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है। यह नैसर्गिक अधिकार भी नहीं है, क्योंकि इसका अस्तित्व और प्रयोग संवैधानिक तथा वैधानिक व्यवस्था पर निर्भर करता है।