JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2017

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से भारत के नागरिक के मूल कर्तव्यों के बारे में सही है/हैं?

  1. इन कर्तव्यों को प्रवर्तित करने के लिए एक विधायी प्रक्रिया दी गई है।

  2. वे विधिक कर्तव्यों के सह-संबंधित हैं।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

A.

केवल 1

B.

केवल 2

C.

1 और 2 दोनों

D.

न तो 1, न ही 2

Correct Answer: D

Detailed Solution

दोनों कथन गलत हैं। मूल कर्तव्य संविधान के भाग IVA के अनुच्छेद 51A में दिए गए हैं। ये नागरिकों के लिए संवैधानिक और नैतिक दायित्व हैं, लेकिन संविधान ने इनके प्रत्यक्ष प्रवर्तन के लिए कोई सामान्य विधायी प्रक्रिया या दंड निर्धारित नहीं किया है।

कथन 1 गलत है। अनुच्छेद 51A में मूल कर्तव्यों की सूची दी गई है, परंतु उनके प्रवर्तन के लिए मूल अधिकारों के अनुच्छेद 32 जैसा कोई विशेष संवैधानिक उपाय नहीं दिया गया है। केवल मूल कर्तव्य का उल्लंघन बताकर सामान्यतः किसी नागरिक को सीधे दंडित नहीं किया जा सकता।

हालाँकि संसद किसी विशिष्ट मूल कर्तव्य को प्रभावी बनाने के लिए कानून बना सकती है। उदाहरणतः:

  • राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के सम्मान से संबंधित आचरण पर राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 लागू होता है।

  • पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 जैसे कानून हैं।

  • सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाने पर सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 लागू हो सकता है।

ऐसे मामलों में दंड मूल कर्तव्य के सीधे उल्लंघन के लिए नहीं, बल्कि संबंधित कानून के उल्लंघन के कारण दिया जाता है।

कथन 2 गलत है। मूल कर्तव्य अपने-आप विधिक कर्तव्य नहीं हैं। उनका पालन संवैधानिक रूप से अपेक्षित है, लेकिन प्रत्येक मूल कर्तव्य के उल्लंघन पर स्वतः कानूनी दंड नहीं लगता। कोई कर्तव्य तभी कानूनी रूप से प्रवर्तनीय बनता है जब उसे प्रभावी करने के लिए विधायिका कानून बनाए।

मूल कर्तव्यों से संबंधित प्रमुख तथ्य:

  • मूल संविधान में मूल कर्तव्य सम्मिलित नहीं थे।

  • स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा दस मूल कर्तव्य जोड़े गए।

  • 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा अनुच्छेद 51A(k) के रूप में ग्यारहवाँ कर्तव्य जोड़ा गया।

  • अनुच्छेद 51A केवल भारत के नागरिकों पर लागू होता है, विदेशियों पर नहीं।

  • मूल कर्तव्य न्यायालय द्वारा सीधे प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन न्यायालय कानूनों की संवैधानिकता और व्याख्या करते समय उनका उपयोग कर सकते हैं।

वर्तमान ग्यारह मूल कर्तव्यों में संविधान, राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्रगान का सम्मान; स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों का पालन; संप्रभुता, एकता एवं अखंडता की रक्षा; देश की रक्षा; सद्भाव को बढ़ावा; समन्वित संस्कृति का संरक्षण; पर्यावरण की रक्षा; वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास; सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा; उत्कृष्टता के लिए प्रयास और बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना शामिल हैं।

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