Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धांत भारत के संविधान के 42वें संशोधन द्वारा राज्य की नीति के निदेशक तत्त्वों में जोड़ा गया था?
समान कार्य के लिए पुरुष और महिला दोनों के लिए समान वेतन
उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी
काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता पाने का अधिकार
कामगारों के लिए निर्वाह मजदूरी एवं मानवीय कार्य-दशाएँ सुरक्षित करना
Correct Answer: B
Detailed Solution
42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 43A जोड़ा गया। यह उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी से संबंधित है।
अनुच्छेद 43A राज्य को उपयुक्त कानून अथवा अन्य उपायों द्वारा उद्योगों में लगे उपक्रमों, प्रतिष्ठानों या अन्य संगठनों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देता है।
कामगारों की भागीदारी के प्रमुख उद्देश्य हैं:
औद्योगिक लोकतंत्र को बढ़ावा देना।
नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच सहयोग बढ़ाना।
कामगारों को निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ना।
औद्योगिक विवादों को कम करना।
उत्पादकता और कार्यस्थल संबंधों में सुधार करना।
कर्मचारियों में उद्यम के प्रति उत्तरदायित्व और सहभागिता की भावना विकसित करना।
42वें संशोधन द्वारा निदेशक तत्त्वों में तीन महत्त्वपूर्ण प्रावधान जोड़े गए थे:
अनुच्छेद 39A: समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता।
अनुच्छेद 43A: उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी।
अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण एवं संवर्धन तथा वन और वन्यजीवों की रक्षा।
इसके अतिरिक्त 42वें संशोधन ने भाग IVA और अनुच्छेद 51A जोड़कर मूल कर्तव्यों को भी संविधान में सम्मिलित किया।
अन्य विकल्पों का परीक्षण:
विकल्प (a) गलत है। पुरुषों और महिलाओं के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत अनुच्छेद 39(d) में है। यह मूल संविधान में ही सम्मिलित था।
विकल्प (c) गलत है। काम, शिक्षा और कुछ परिस्थितियों में सार्वजनिक सहायता का प्रावधान अनुच्छेद 41 में है। यह भी मूल संविधान का भाग था।
विकल्प (d) गलत है। निर्वाह मजदूरी का प्रावधान अनुच्छेद 43 और न्यायसंगत एवं मानवीय कार्य-दशाओं का प्रावधान अनुच्छेद 42 में है। दोनों मूल संविधान में सम्मिलित थे।
अनुच्छेद 43A एक निदेशक तत्त्व है। इसलिए यह न्यायालय द्वारा सीधे प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान नहीं करता, लेकिन कामगारों की प्रबंधकीय भागीदारी को बढ़ाने वाली नीतियों और कानूनों के लिए संवैधानिक आधार प्रदान करता है।