Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
भारत के संविधान के संदर्भ में, राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व निम्नलिखित पर परिसीमाएँ लगाते हैं:
विधायी कृत्य
कार्यपालिका कृत्य
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: D
Detailed Solution
राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व विधायिका और कार्यपालिका की शक्तियों पर न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय परिसीमाएँ नहीं लगाते। वे राज्य को सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना के लिए सकारात्मक निर्देश एवं संवैधानिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इसलिए दोनों कथन गलत हैं।
संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक निदेशक तत्त्व दिए गए हैं। अनुच्छेद 37 उनकी संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करता है:
निदेशक तत्त्व किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।
वे देश के शासन में मूलभूत हैं।
कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
कथन 1 गलत है। निदेशक तत्त्व विधायिका की कानून बनाने की शक्ति पर प्रत्यक्ष, नकारात्मक और न्यायोचित सीमा नहीं लगाते। केवल किसी निदेशक तत्त्व से असंगत होने के कारण कोई कानून स्वतः अमान्य नहीं हो जाता। वे विधायिका को कल्याणकारी कानून बनाने के लिए दिशा देते हैं।
कथन 2 गलत है। निदेशक तत्त्व कार्यपालिका के कार्यों पर भी प्रत्यक्ष न्यायोचित सीमा नहीं लगाते। वे सरकार के लिए नीतिगत लक्ष्य निर्धारित करते हैं, लेकिन सामान्यतः कोई व्यक्ति केवल निदेशक तत्त्व का उल्लंघन बताकर उसके प्रवर्तन की माँग नहीं कर सकता।
विधायिका और कार्यपालिका पर वास्तविक संवैधानिक परिसीमाएँ मुख्यतः निम्नसे आती हैं:
मूल अधिकारों का पालन।
विधायी शक्तियों का संघ एवं राज्यों के बीच संवैधानिक विभाजन।
संविधान और कानून के अधीन कार्य करने की बाध्यता।
न्यायिक समीक्षा।
शक्तियों के पृथक्करण और विधि के शासन जैसे संवैधानिक सिद्धांत।
इसका अर्थ यह नहीं है कि निदेशक तत्त्व महत्त्वहीन हैं। न्यायालय मूल अधिकारों की व्याख्या करते समय निदेशक तत्त्वों का सहारा लेते हैं और दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करते हैं। शिक्षा, विधिक सहायता, पंचायत, श्रमिक कल्याण, लोक स्वास्थ्य और पर्यावरण से संबंधित अनेक कानून निदेशक तत्त्वों से प्रेरित हैं।
अनुच्छेद 31C के अनुसार अनुच्छेद 39(b) और 39(c) को लागू करने वाले कानूनों को अनुच्छेद 14 और 19 के आधार पर चुनौती से सीमित संरक्षण प्राप्त हो सकता है। फिर भी यह संरक्षण न्यायिक समीक्षा से पूरी तरह बाहर नहीं है।
अतः निदेशक तत्त्व विधायी या कार्यपालिका कृत्यों पर प्रत्यक्ष न्यायोचित परिसीमाएँ नहीं, बल्कि राज्य के लिए सकारात्मक संवैधानिक निर्देश हैं। दोनों कथन गलत हैं।