Previous Year Question
भारत के संविधान में शोषण के विरुद्ध अधिकार द्वारा निम्नलिखित में से कौन-से परिकल्पित हैं?
मानव देह व्यापार और बंधुआ मजदूरी (बेगार) का निषेध
अस्पृश्यता का उन्मूलन
अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा
कारखानों और खदानों में बच्चों के नियोजन का निषेध
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
केवल 1, 2 और 4
केवल 2, 3 और 4
केवल 1 और 4
1, 2, 3 और 4
Correct Answer: C
Detailed Solution
संविधान के भाग III में अनुच्छेद 23 और 24 शोषण के विरुद्ध अधिकार प्रदान करते हैं। इसलिए कथन 1 और 4 सही हैं।
कथन 1 सही है। अनुच्छेद 23 मानव का दुर्व्यापार, बेगार और इसी प्रकार के अन्य बलात् श्रम का निषेध करता है। इसके उल्लंघन को कानून के अनुसार दंडनीय अपराध बनाया गया है।
अनुच्छेद 23 की प्रमुख विशेषताएँ हैं:
यह नागरिकों और गैर-नागरिकों, दोनों को संरक्षण देता है।
यह राज्य के साथ-साथ निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी लागू होता है।
‘बेगार’ का अर्थ बिना पारिश्रमिक के जबरन काम कराना है।
अन्य प्रकार का बलात् श्रम भी निषिद्ध है, चाहे बाध्यता शारीरिक, कानूनी अथवा आर्थिक परिस्थितियों से उत्पन्न हुई हो।
अनुच्छेद 23(2) राज्य को सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनिवार्य सेवा लागू करने की अनुमति देता है, लेकिन ऐसी सेवा में केवल धर्म, मूलवंश, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।
कथन 2 गलत है। अस्पृश्यता का उन्मूलन अनुच्छेद 17 के अंतर्गत समता के अधिकार में आता है, शोषण के विरुद्ध अधिकार में नहीं।
कथन 3 गलत है। अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण मुख्यतः अनुच्छेद 29 और 30 के अंतर्गत सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों में आता है।
कथन 4 सही है। अनुच्छेद 24 के अनुसार चौदह वर्ष से कम आयु के किसी बच्चे को किसी कारखाने या खदान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा और न किसी अन्य परिसंकटमय नियोजन में लगाया जाएगा।
अनुच्छेद 24 के अतिरिक्त संसद ने बालक और किशोर श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 बनाया है। वर्ष 2016 के संशोधन के बाद यह कानून सामान्यतः:
चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों के सभी व्यवसायों और प्रक्रियाओं में नियोजन को प्रतिबंधित करता है, यद्यपि कानून में कुछ सीमित अपवाद दिए गए हैं।
चौदह से अठारह वर्ष के किशोरों को परिसंकटमय व्यवसायों और प्रक्रियाओं में नियोजित किए जाने से रोकता है।
उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के लिए दंड का प्रावधान करता है।
मानव दुर्व्यापार के निषेध, बंधुआ श्रम की समाप्ति और बाल श्रम के नियंत्रण के लिए संसद ने अनुच्छेद 35 के अंतर्गत कानून बनाने की शक्ति का भी प्रयोग किया है।