JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2020

Previous Year Question

निम्नलिखित में से मूल अधिकारों के किस संवर्ग में अस्पृश्यता के रूप में किए गए विभेदन के विरुद्ध संरक्षण समाविष्ट है?

A.

शोषण के विरुद्ध अधिकार

B.

स्वतंत्रता का अधिकार

C.

संवैधानिक उपचारों का अधिकार

D.

समता का अधिकार

Correct Answer: D

Detailed Solution

अस्पृश्यता के उन्मूलन का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 17 में है। अनुच्छेद 17 संविधान के भाग III में दिए गए समता के अधिकार के अंतर्गत आता है।

अनुच्छेद 17:

  • अस्पृश्यता का अंत करता है।

  • किसी भी रूप में अस्पृश्यता के आचरण को निषिद्ध करता है।

  • अस्पृश्यता से उत्पन्न किसी निर्योग्यता को लागू करना कानून के अनुसार दंडनीय अपराध बनाता है।

समता के अधिकार में अनुच्छेद 14 से 18 सम्मिलित हैं:

  • अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण।

  • अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग अथवा जन्मस्थान के आधार पर विभेद का निषेध।

  • अनुच्छेद 16: लोक नियोजन में अवसर की समता।

  • अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का अंत।

  • अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत।

अनुच्छेद 17 एक विशेष सामाजिक कुप्रथा के विरुद्ध संवैधानिक निषेध है। यह केवल राज्य के विरुद्ध ही नहीं, बल्कि निजी व्यक्तियों के आचरण पर भी लागू होता है। कोई व्यक्ति, समूह या संस्था अस्पृश्यता के आधार पर किसी दूसरे व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान, सेवा अथवा सुविधा से वंचित नहीं कर सकता।

संसद ने अनुच्छेद 17 को प्रभावी बनाने के लिए अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955 बनाया। वर्ष 1976 में इसका नाम बदलकर नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 कर दिया गया और दंडात्मक प्रावधानों को अधिक कठोर बनाया गया।

इस अधिनियम में ‘नागरिक अधिकार’ से आशय ऐसे अधिकार से है जो संविधान के अनुच्छेद 17 द्वारा अस्पृश्यता के अंत के कारण किसी व्यक्ति को प्राप्त होता है। इसके अंतर्गत अस्पृश्यता के आधार पर पूजा-स्थलों, दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक जलस्रोतों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुँच रोकना दंडनीय हो सकता है।

संविधान या नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम में ‘अस्पृश्यता’ की कोई शाब्दिक परिभाषा नहीं दी गई है। इसका प्रयोग ऐतिहासिक रूप से जाति-आधारित अस्पृश्यता की सामाजिक प्रथा के अर्थ में किया जाता है।

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