Previous Year Question
भारत में, न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक्करण, किसके द्वारा व्यादेशित है?
संविधान की उद्देशिका
राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व
सातवीं अनुसूची
परंपरागत प्रथा
Correct Answer: B
Detailed Solution
न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने का स्पष्ट संवैधानिक निर्देश अनुच्छेद 50 में दिया गया है। अनुच्छेद 50 संविधान के भाग IV—राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व में स्थित है।
अनुच्छेद 50 के अनुसार, राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने के लिए राज्य कदम उठाएगा।
इस पृथक्करण के प्रमुख उद्देश्य हैं:
न्यायिक स्वतंत्रता तथा निष्पक्षता सुनिश्चित करना।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुचित प्रभाव से न्यायिक निर्णयों को बचाना।
शक्तियों के पृथक्करण और विधि के शासन को मजबूत करना।
विशेष रूप से अधीनस्थ न्यायपालिका को कार्यपालिका के नियंत्रण से स्वतंत्र रखना।
नागरिकों को निष्पक्ष सुनवाई और न्यायिक संरक्षण उपलब्ध कराना।
अनुच्छेद 50 को अधीनस्थ न्यायपालिका से संबंधित अन्य प्रावधानों के साथ समझना चाहिए:
अनुच्छेद 233: जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है।
अनुच्छेद 234: जिला न्यायाधीशों के अतिरिक्त न्यायिक सेवा में नियुक्तियाँ राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद की जाती हैं।
अनुच्छेद 235: जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण उच्च न्यायालय में निहित है।
अन्य विकल्प सही नहीं हैं क्योंकि उद्देशिका में न्यायपालिका-कार्यपालिका पृथक्करण का प्रत्यक्ष निर्देश नहीं है। सातवीं अनुसूची संघ एवं राज्यों के बीच विधायी विषयों का वितरण करती है। यह केवल संवैधानिक परंपरा भी नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 50 में इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
अतः सही उत्तर राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व है।