Previous Year Question
मूल अधिकारों के अतिरिक्त, भारत के संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा/से भाग मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा (1948) के सिद्धांतों और प्रावधानों को प्रतिबिंबित करता/करते है/हैं?
उद्देशिका
राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व
मूल कर्तव्य
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
1 और 2
केवल 2
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Solution
मूल अधिकारों के अतिरिक्त संविधान की उद्देशिका, राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व और मूल कर्तव्य, तीनों मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा अर्थात UDHR, 1948 के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करते हैं।
कथन 1 सही है। संविधान की उद्देशिका सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा एवं अवसर की समता तथा व्यक्ति की गरिमा सुनिश्चित करने वाली बंधुता की घोषणा करती है।
इन आदर्शों की समानता UDHR के निम्न सिद्धांतों से है:
सभी मनुष्यों की स्वतंत्रता, समानता और गरिमा।
जीवन, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सुरक्षा।
विचार, अंतःकरण, धर्म तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
समान संरक्षण एवं भेदभाव का निषेध।
कथन 2 सही है। निदेशक तत्त्व UDHR में उल्लिखित सामाजिक और आर्थिक अधिकारों को प्रतिबिंबित करते हैं। उदाहरणतः:
अनुच्छेद 38—न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था।
अनुच्छेद 39—पर्याप्त आजीविका, समान वेतन और श्रमिकों तथा बच्चों की सुरक्षा।
अनुच्छेद 39A—समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता।
अनुच्छेद 41—काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता।
अनुच्छेद 42—मानवीय कार्य-दशाएँ एवं प्रसूति सहायता।
अनुच्छेद 43—निर्वाह मजदूरी और सम्मानजनक जीवन स्तर।
अनुच्छेद 47—पोषण स्तर और लोक स्वास्थ्य में सुधार।
ये प्रावधान UDHR में वर्णित सामाजिक सुरक्षा, कार्य, उचित मजदूरी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्याप्त जीवन स्तर जैसे अधिकारों के अनुरूप हैं।
कथन 3 सही है। अनुच्छेद 51A में दिए गए मूल कर्तव्य भी मानवाधिकार संबंधी सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करते हैं। UDHR का अनुच्छेद 29 स्पष्ट करता है कि प्रत्येक व्यक्ति के उस समुदाय के प्रति कर्तव्य हैं जिसमें उसके व्यक्तित्व का स्वतंत्र और पूर्ण विकास संभव है।
भारतीय संविधान में सद्भाव एवं बंधुत्व बढ़ाना, समन्वित संस्कृति की विरासत का संरक्षण, पर्यावरण की रक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा जैसे मूल कर्तव्य इसी सामाजिक उत्तरदायित्व को प्रकट करते हैं।
मूल कर्तव्य 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए थे। प्रारंभ में दस कर्तव्य थे; 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा ग्यारहवाँ कर्तव्य जोड़ा गया।