Previous Year Question
भारत के संविधान का कौन-सा भाग कल्याणकारी राज्य के आदर्श की घोषणा करता है?
राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व
मूल अधिकार
उद्देशिका
सातवीं अनुसूची
Correct Answer: A
Detailed Solution
भारत में कल्याणकारी राज्य के आदर्श को मुख्यतः संविधान के भाग IV में दिए गए राज्य की नीति के निदेशक तत्त्वों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।
कल्याणकारी राज्य का अर्थ ऐसे राज्य से है जो केवल कानून-व्यवस्था और सुरक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिकों के सामाजिक और आर्थिक कल्याण, समान अवसर, स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से कार्य करे।
भाग IV में कल्याणकारी राज्य से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े प्रमुख प्रावधान हैं:
अनुच्छेद 38: राज्य लोककल्याण की अभिवृद्धि के लिए ऐसी सामाजिक व्यवस्था स्थापित करेगा जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय विद्यमान हो। यह कल्याणकारी राज्य का सबसे स्पष्ट संवैधानिक आधार है।
अनुच्छेद 39: पर्याप्त आजीविका, सामुदायिक संसाधनों का सामान्य हित में वितरण, धन के संकेंद्रण को रोकना, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा श्रमिकों और बच्चों की सुरक्षा।
अनुच्छेद 39A: समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता।
अनुच्छेद 41: राज्य की आर्थिक क्षमता के भीतर काम, शिक्षा और बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी तथा अशक्तता की दशाओं में सार्वजनिक सहायता।
अनुच्छेद 42: न्यायसंगत एवं मानवीय कार्य-दशाएँ और प्रसूति सहायता।
अनुच्छेद 43: कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी और सम्मानजनक जीवन स्तर।
अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों की अभिवृद्धि।
अनुच्छेद 47: पोषण स्तर, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य में सुधार।
अन्य विकल्पों का परीक्षण:
मूल अधिकार मुख्यतः व्यक्तियों की स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की न्यायिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
उद्देशिका सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सहित संविधान के व्यापक आदर्श घोषित करती है, लेकिन कल्याणकारी राज्य को कार्यरूप देने वाले विस्तृत निर्देश भाग IV में हैं।
सातवीं अनुसूची संघ और राज्यों के बीच विधायी विषयों का विभाजन करती है।
अतः सही उत्तर राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व है।