JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2021

Previous Year Question

भारतीय संविधान के अंतर्गत, धन का संकेंद्रण किसका उल्लंघन करता है?

A.

समता के अधिकार का

B.

राज्य की नीति के निदेशक तत्त्वों का

C.

स्वतंत्रता के अधिकार का

D.

कल्याण की अवधारणा का

Correct Answer: B

Detailed Solution

धन और उत्पादन के साधनों का ऐसा संकेंद्रण, जो सामान्य हित के लिए हानिकारक हो, संविधान के अनुच्छेद 39(c) में दिए गए राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व का उल्लंघन करता है।

अनुच्छेद 39(c) राज्य को अपनी नीति इस प्रकार निर्देशित करने का आदेश देता है कि:

आर्थिक व्यवस्था के संचालन का परिणाम धन और उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण न हो।

यह प्रावधान संविधान के भाग IV में है। इसका उद्देश्य ऐसी आर्थिक व्यवस्था स्थापित करना है जिसमें संसाधन कुछ व्यक्तियों या समूहों के हाथों में अत्यधिक केंद्रित न हों और आर्थिक शक्ति का उपयोग व्यापक सामाजिक हित में किया जाए।

अनुच्छेद 39 के संबंधित प्रावधान हैं:

  • अनुच्छेद 39(a): पुरुष और स्त्री सभी नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का समान अधिकार।

  • अनुच्छेद 39(b): समुदाय के भौतिक संसाधनों के स्वामित्व और नियंत्रण का ऐसा वितरण, जिससे सामूहिक हित की सर्वोत्तम पूर्ति हो।

  • अनुच्छेद 39(c): धन और उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण रोकना।

  • अनुच्छेद 39(d): समान कार्य के लिए पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन।

  • अनुच्छेद 39(e): श्रमिकों के स्वास्थ्य और शक्ति तथा बच्चों की सुकुमार अवस्था के दुरुपयोग की रोकथाम।

  • अनुच्छेद 39(f): बच्चों को स्वस्थ विकास, स्वतंत्रता और गरिमा के अवसर तथा शोषण से सुरक्षा।

अनुच्छेद 38 भी राज्य को लोककल्याण के लिए सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने और आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं एवं अवसरों की असमानताओं को कम करने का निर्देश देता है।

अनुच्छेद 37 के अनुसार निदेशक तत्त्व न्यायालय द्वारा सीधे प्रवर्तनीय नहीं हैं। फिर भी वे देश के शासन में मूलभूत हैं और कानून बनाते समय उन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है। इसलिए अनुच्छेद 39(c) सरकार की कर-व्यवस्था, प्रतिस्पर्धा नीति, भूमि सुधार, आर्थिक विनियमन और संसाधनों के वितरण जैसी नीतियों को संवैधानिक दिशा देता है।

अन्य विकल्प गलत हैं:

  • समता का अधिकार अनुच्छेद 14 से 18 में है।

  • स्वतंत्रता का अधिकार मुख्यतः अनुच्छेद 19 से 22 में है।

  • “कल्याण की अवधारणा” संविधान में इस प्रश्न के लिए पृथक प्रवर्तनीय श्रेणी नहीं है।

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