JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2021

Previous Year Question

भारत में संपत्ति के अधिकार की क्या स्थिति है?

A.

केवल नागरिकों को उपलब्ध कानूनी अधिकार

B.

किसी भी व्यक्ति को उपलब्ध कानूनी अधिकार

C.

केवल नागरिकों को उपलब्ध मूल अधिकार

D.

न तो मूल अधिकार, न कानूनी अधिकार

Correct Answer: B

Detailed Solution

भारत में संपत्ति का अधिकार अब मूल अधिकार नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 300A के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को उपलब्ध संवैधानिक अधिकार है। दिए गए विकल्पों में इसे कानूनी अधिकार कहने वाला विकल्प (b) सबसे उपयुक्त है।

अनुच्छेद 300A के अनुसार:

किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार द्वारा ही वंचित किया जाएगा।

इस अनुच्छेद में “नागरिक” के स्थान पर “व्यक्ति” शब्द का प्रयोग हुआ है। इसलिए इसका संरक्षण:

  • भारतीय नागरिकों

  • गैर-नागरिकों

  • कंपनियों जैसे विधिक व्यक्तियों

को भी प्राप्त हो सकता है।

संपत्ति के अधिकार की संवैधानिक यात्रा

मूल संविधान में संपत्ति का अधिकार दो प्रावधानों द्वारा मूल अधिकार के रूप में संरक्षित था:

  • अनुच्छेद 19(1)(f)—संपत्ति अर्जित करने, धारण करने और उसका व्ययन करने का अधिकार।

  • अनुच्छेद 31—विधि के प्राधिकार के बिना संपत्ति से वंचित किए जाने के विरुद्ध संरक्षण।

44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 19(1)(f) और अनुच्छेद 31 को मूल अधिकारों से हटा दिया गया तथा अनुच्छेद 300A जोड़ा गया। यह परिवर्तन 20 जून, 1979 से प्रभावी हुआ।

अनुच्छेद 300A का प्रभाव

राज्य केवल प्रशासनिक आदेश या बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति की संपत्ति नहीं ले सकता। संपत्ति से वंचित करने के लिए:

  • विधायिका द्वारा बनाया गया वैध कानून होना चाहिए।

  • निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।

  • कार्रवाई मनमानी नहीं होनी चाहिए।

  • संपत्ति अधिग्रहण सार्वजनिक उद्देश्य से संबंधित होना चाहिए।

  • कानून द्वारा निर्धारित प्रतिकर और प्रक्रियात्मक सुरक्षा का पालन किया जाना चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय ने संपत्ति के अधिकार को संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ मानव अधिकार भी माना है। राज्य द्वारा बिना विधिक प्रक्रिया के किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से बेदखल करना अनुच्छेद 300A का उल्लंघन होगा।

चूँकि यह मूल अधिकार नहीं है, केवल अनुच्छेद 300A के उल्लंघन के आधार पर सीधे अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार सामान्यतः उपलब्ध नहीं होता। प्रभावित व्यक्ति अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय या अन्य सक्षम न्यायिक मंच की शरण ले सकता है।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.