JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

POLITY · 2021

Previous Year Question

विधि के अनुप्रयोग के मामले में कोई विधान, जो कार्यपालिका अथवा प्रशासनिक प्राधिकारी को अनिर्देशित एवं अनियंत्रित विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है, भारत के संविधान के निम्नलिखित अनुच्छेदों में से किसका उल्लंघन करता है?

A.

अनुच्छेद 14

B.

अनुच्छेद 28

C.

अनुच्छेद 32

D.

अनुच्छेद 44

Correct Answer: A

Detailed Solution

कार्यपालिका या प्रशासनिक प्राधिकारी को विधि लागू करने के संबंध में अनिर्देशित और अनियंत्रित विवेकाधीन शक्ति प्रदान करने वाला विधान अनुच्छेद 14 में निहित समानता और गैर-मनमानी के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।

अनुच्छेद 14 राज्य को किसी भी व्यक्ति को:

  • विधि के समक्ष समानता से वंचित करने; अथवा

  • भारत के राज्य-क्षेत्र में विधियों के समान संरक्षण से वंचित करने

से रोकता है। इसमें “व्यक्ति” शब्द प्रयुक्त है, इसलिए इसका संरक्षण नागरिकों, विदेशियों और विधिक व्यक्तियों—जैसे कंपनियों—को भी प्राप्त हो सकता है।

यदि किसी कानून में यह निर्धारित करने के लिए स्पष्ट नीति, मानदंड या मार्गदर्शक सिद्धांत नहीं हैं कि वह किस व्यक्ति पर और किन परिस्थितियों में लागू होगा, तो अधिकारी समान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों के साथ अलग-अलग व्यवहार कर सकता है। ऐसी अनियंत्रित शक्ति:

  • पक्षपात और भेदभाव की संभावना उत्पन्न करती है।

  • समान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों के असमान व्यवहार की अनुमति देती है।

  • प्रशासनिक कार्रवाई को मनमाना बनाती है।

  • कानून के शासन को कमजोर करती है।

अनुच्छेद 14 प्रत्येक प्रकार के वर्गीकरण को प्रतिबंधित नहीं करता। यह वर्ग-विधान को प्रतिबंधित करता है, लेकिन युक्तियुक्त वर्गीकरण की अनुमति देता है। वैध वर्गीकरण के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं:

  1. वर्गीकरण किसी स्पष्ट और बोधगम्य अंतर पर आधारित हो।

  2. उस अंतर का कानून के उद्देश्य से तर्कसंगत संबंध हो।

उच्चतम न्यायालय ने समानता के सिद्धांत को केवल वर्गीकरण तक सीमित नहीं रखा है। न्यायिक व्याख्या के अनुसार मनमानी समानता की विरोधी है। इसलिए विधायी और कार्यकारी, दोनों प्रकार की मनमानी कार्रवाई अनुच्छेद 14 के अंतर्गत जाँची जा सकती है।

इसका अर्थ यह नहीं कि प्रशासन को कोई विवेकाधीन शक्ति नहीं दी जा सकती। विवेकाधिकार वैध है, यदि कानून:

  • उसका उद्देश्य स्पष्ट करे।

  • उसके प्रयोग के मानदंड निर्धारित करे।

  • पर्याप्त प्रक्रियात्मक सुरक्षा प्रदान करे।

  • निर्णय की समीक्षा अथवा अपील की व्यवस्था रखे।

अन्य विकल्प गलत हैं:

  • अनुच्छेद 28—कुछ शैक्षणिक संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या उपासना से संबंधित स्वतंत्रता।

  • अनुच्छेद 32—मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार।

  • अनुच्छेद 44—नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता से संबंधित निदेशक तत्त्व।

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