Previous Year Question
भारत में निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन को मूल अधिकारों की न्यायिक व्याख्याओं को निष्प्रभावी करने के लिए अधिनियमित किया गया माना जाता है?
पहला संशोधन
42वाँ संशोधन
44वाँ संशोधन
86वाँ संशोधन
Correct Answer: A
Detailed Solution
संविधान (प्रथम संशोधन) अधिनियम, 1951 को प्रारंभिक वर्षों में उच्चतम न्यायालय द्वारा मूल अधिकारों की गई कुछ व्याख्याओं और उनसे उत्पन्न संवैधानिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए अधिनियमित किया गया था। इसे 18 जून, 1951 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली।
इसके पीछे तीन प्रमुख संवैधानिक विषय थे:
1. वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य और बृज भूषण बनाम दिल्ली राज्य जैसे मामलों में न्यायालय ने तत्कालीन अनुच्छेद 19(2) की संकीर्ण व्याख्या की थी। प्रथम संशोधन ने अनुच्छेद 19(2) में परिवर्तन करके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर “युक्तियुक्त निर्बंध” लगाने की व्यवस्था स्पष्ट की तथा लोक व्यवस्था, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध और अपराध के लिए उद्दीपन जैसे आधार जोड़े।
2. सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग
मद्रास राज्य बनाम चम्पकम दोरैराजन मामले में जाति-आधारित शैक्षणिक आरक्षण की व्यवस्था को मूल अधिकारों से असंगत माना गया था। इसके बाद प्रथम संशोधन ने अनुच्छेद 15(4) जोड़ा।
इसने राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों तथा अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान बनाने की शक्ति दी।
3. भूमि सुधार कानूनों का संरक्षण
जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार कानूनों को न्यायिक चुनौती से संरक्षण देने के लिए:
अनुच्छेद 31A जोड़ा गया, जिसने भूमि-संपदा के अर्जन सहित कुछ श्रेणियों के कानूनों को संरक्षण प्रदान किया।
अनुच्छेद 31B जोड़ा गया।
नौवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें प्रारंभ में 13 कानून रखे गए थे।
प्रथम संशोधन ने अनुच्छेद 19(6) में भी परिवर्तन करके राज्य को किसी व्यापार, कारोबार, उद्योग या सेवा पर पूर्ण अथवा आंशिक एकाधिकार स्थापित करने की संवैधानिक अनुमति स्पष्ट की।
अन्य विकल्पों का संबंध:
42वाँ संशोधन, 1976: प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द; मूल कर्तव्य; निदेशक तत्त्वों और केंद्र की शक्तियों से संबंधित व्यापक परिवर्तन।
44वाँ संशोधन, 1978: आपातकाल के बाद नागरिक स्वतंत्रताओं की पुनर्स्थापना; संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार से हटाकर अनुच्छेद 300A के अंतर्गत संवैधानिक अधिकार बनाना।
86वाँ संशोधन, 2002: अनुच्छेद 21A द्वारा 6–14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा का मूल अधिकार; अनुच्छेद 45 में परिवर्तन और अनुच्छेद 51A(k) का समावेश।