Previous Year Question
भारतीय इतिहास के संदर्भ में, प्रांतों से संविधान सभा के सदस्य—
उन प्रांतों के लोगों द्वारा सीधे निर्वाचित हुए थे।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग द्वारा नामित हुए थे।
प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा निर्वाचित हुए थे।
सरकार द्वारा संवैधानिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता के लिए चुने गए थे।
Correct Answer: C
Detailed Solution
संविधान सभा में प्रांतों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था। इसलिए विकल्प (c) सही है।
संविधान सभा का गठन वर्ष 1946 की कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार किया गया था। संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर जनता द्वारा सीधे नहीं किया गया था।
अविभाजित भारत की संविधान सभा की निर्धारित सदस्य संख्या 389 थी:
292 सदस्य ब्रिटिश भारतीय प्रांतों से चुने जाने थे।
4 सदस्य मुख्य आयुक्तों के प्रांतों का प्रतिनिधित्व करते थे।
93 सदस्य देशी रियासतों का प्रतिनिधित्व करते थे।
प्रांतों को सामान्यतः प्रत्येक दस लाख जनसंख्या पर एक स्थान दिया गया था। प्रांतीय स्थानों को मुख्य समुदायों—सामान्य, मुस्लिम और सिख—के बीच उनकी जनसंख्या के अनुपात में बाँटा गया था।
प्रत्येक समुदाय के लिए निर्धारित प्रतिनिधियों का निर्वाचन प्रांतीय विधान सभा में उसी समुदाय के सदस्यों द्वारा किया जाता था। चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली अपनाई गई थी।
देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया अलग थी। उनका जनता या प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा निर्वाचन नहीं होना था; उन्हें रियासतों के शासकों द्वारा नामित किया जाना था। प्रारंभ में अनेक रियासतों ने संविधान सभा में भाग नहीं लिया था।
भारत के विभाजन के बाद संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 से घटकर 299 हो गई। इनमें 229 सदस्य प्रांतों से और 70 सदस्य देशी रियासतों से थे।
विकल्प (a) गलत है, क्योंकि प्रांतों के सदस्यों का जनता द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन नहीं हुआ था।
विकल्प (b) गलत है। कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने अपने उम्मीदवार अवश्य खड़े किए और चुनावों में प्रमुख दल रहे, लेकिन संवैधानिक रूप से सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधान सभाओं ने किया था; वे केवल राजनीतिक दलों द्वारा नामित सदस्य नहीं थे।
विकल्प (d) गलत है, क्योंकि प्रांतीय प्रतिनिधियों के चयन का आधार सरकार द्वारा निर्धारित विशेषज्ञता नहीं, बल्कि प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा निर्वाचन था।