Previous Year Question
भारत के संविधान की उद्देशिका—
संविधान का भाग है किंतु उसका कोई विधिक प्रभाव नहीं है।
संविधान का भाग नहीं है और उसका कोई विधिक प्रभाव भी नहीं है।
संविधान का भाग है और उसका वही विधिक प्रभाव है जो संविधान के किसी अन्य भाग का है।
संविधान का भाग है किंतु संविधान के अन्य भागों से स्वतंत्र होकर उसका कोई विधिक प्रभाव नहीं है।
Correct Answer: D
Detailed Solution
भारत के संविधान की उद्देशिका संविधान का भाग है, लेकिन वह संविधान के अन्य प्रावधानों से स्वतंत्र रूप से न तो सरकार को कोई शक्ति प्रदान करती है और न ही न्यायालय में सीधे प्रवर्तनीय अधिकार देती है। इसलिए विकल्प (d) सही है।
उद्देशिका संविधान की मूल दार्शनिक दिशा को व्यक्त करती है। इसमें भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने तथा नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता और समानता प्रदान करने और बंधुता बढ़ाने का संकल्प दिया गया है।
उद्देशिका का संवैधानिक महत्त्व
उद्देशिका संविधान-निर्माताओं के उद्देश्यों और संविधान के आधारभूत मूल्यों को समझने की कुंजी है। जब किसी संवैधानिक प्रावधान के अर्थ में अस्पष्टता हो और एक से अधिक व्याख्याएँ संभव हों, तब न्यायालय उद्देशिका की सहायता से ऐसी व्याख्या स्वीकार कर सकता है जो संविधान के मूल उद्देश्यों के अनुकूल हो।
फिर भी उद्देशिका:
विधायिका, कार्यपालिका अथवा न्यायपालिका की शक्ति का स्वतंत्र स्रोत नहीं है।
अपने आप में न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान नहीं करती।
संविधान के स्पष्ट शब्दों को समाप्त, विस्तृत या परिवर्तित नहीं कर सकती।
संविधान के किसी स्पष्ट प्रावधान के विपरीत प्रयोग नहीं की जा सकती।
बेरुबारी यूनियन मामले, 1960 में उच्चतम न्यायालय ने राय दी थी कि उद्देशिका संविधान का भाग नहीं है। न्यायालय ने यह भी माना कि उद्देशिका संविधान-निर्माताओं के आशय को समझने में सहायक हो सकती है, लेकिन वह किसी वास्तविक शक्ति का स्रोत नहीं है।
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य, 1973 में उच्चतम न्यायालय ने पहले के दृष्टिकोण को बदलते हुए निर्धारित किया कि उद्देशिका संविधान का भाग है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उद्देशिका में अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है, लेकिन संशोधन द्वारा संविधान की मूल संरचना को नष्ट नहीं किया जा सकता।
इसी कारण उद्देशिका में 42वें संविधान संशोधन द्वारा परिवर्तन किया गया और “समाजवादी”, “पंथनिरपेक्ष” तथा “अखंडता” संबंधी अभिव्यक्तियाँ जोड़ी गईं।
विकल्प (a) गलत है, क्योंकि उद्देशिका का विधिक और व्याख्यात्मक महत्त्व है।
विकल्प (b) गलत है, क्योंकि केशवानंद भारती निर्णय के अनुसार उद्देशिका संविधान का भाग है।
विकल्प (c) गलत है, क्योंकि उद्देशिका का वही स्वतंत्र विधिक प्रभाव नहीं है जो प्रवर्तनीय संवैधानिक प्रावधानों का होता है।
अतः उद्देशिका संविधान का भाग है, लेकिन उसका संविधान के अन्य भागों से स्वतंत्र कोई विधिक प्रभाव नहीं है।