Previous Year Question
कुछ वर्ष पहले तक गिद्ध भारतीय देहातों में बहुत आम दिखाई देते थे, किन्तु आजकल कभी-कभार ही नजर आते हैं। इस स्थिति के लिए उत्तरदायी है
नई आक्रामक जातियों द्वारा उनके नीड़ स्थलों का विनाश
पशु मालिकों द्वारा अपने रोगग्रस्त मवेशियों के उपचार में प्रयुक्त एक औषधि
उनके लिए उपलब्ध भोजन की कमी
उनमें फैला कोई व्यापक, सतत और घातक रोग
Correct Answer: B
Detailed Solution
भारत में गिद्धों की संख्या में तीव्र गिरावट का प्रमुख कारण पशु-चिकित्सा में डाइक्लोफेनाक औषधि का उपयोग था।
डाइक्लोफेनाक एक नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग है।
इसका उपयोग मवेशियों में दर्द और सूजन के उपचार के लिए किया जाता था।
उपचार के तुरंत बाद मरने वाले मवेशियों के ऊतकों में डाइक्लोफेनाक का अवशेष रह सकता था।
गिद्ध ऐसे मवेशियों के शवों को खाते समय इस औषधि के संपर्क में आते थे।
डाइक्लोफेनाक की बहुत कम मात्रा भी गिद्धों के लिए अत्यधिक विषैली हो सकती है।
इससे गिद्धों में तीव्र वृक्क-विफलता उत्पन्न होती है।
वृक्कों के कार्य न करने के कारण शरीर में यूरिक अम्ल जमा हो जाता है।
इससे आंतरिक अंगों पर यूरेट क्रिस्टल जमा होने की स्थिति उत्पन्न होती है, जिसे विसरल गाउट कहा जाता है।
यह स्थिति गिद्धों की मृत्यु का कारण बनती है।
भारतीय सफेद-पीठ गिद्ध, लंबी चोंच वाला गिद्ध और पतली चोंच वाला गिद्ध इससे विशेष रूप से प्रभावित हुए।
गिद्धों की आबादी में गिरावट का प्रमुख कारण न तो भोजन की सामान्य कमी थी और न ही कोई संक्रामक व्यापक रोग।
गिद्ध मृत पशुओं के शवों को तेजी से साफ करके प्राकृतिक सफाईकर्मी की भूमिका निभाते हैं।
गिद्धों की कमी से शव अधिक समय तक खुले रह सकते हैं और आवारा कुत्तों जैसे अन्य मुर्दाखोर जीवों की संख्या बढ़ सकती है।
इसलिए सही उत्तर रोगग्रस्त मवेशियों के उपचार में प्रयुक्त डाइक्लोफेनाक औषधि है।