JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2015

Previous Year Question

कृषि में नाइट्रोजनी उर्वरकों के अत्यधिक/अनुपयुक्त उपयोग का क्या प्रभाव हो सकता है?

  1. मृदा में नाइट्रोजन-स्थिरीकारी सूक्ष्मजीवों का प्रचुरोद्भवन हो सकता है।

  2. मृदा की अम्लता में बढ़ोतरी हो सकती है।

  3. भौम जल में नाइट्रेट का निक्षालन हो सकता है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A.

1 और 3

B.

केवल 2

C.

2 और 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: C

Detailed Solution

  • नाइट्रोजनी उर्वरक पौधों को मुख्यतः अमोनियम अथवा नाइट्रेट के रूप में नाइट्रोजन उपलब्ध कराते हैं।

  • यूरिया, अमोनियम सल्फेट और अमोनियम नाइट्रेट इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

  • मृदा में आसानी से उपलब्ध नाइट्रोजन की अत्यधिक मात्रा जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण की आवश्यकता को कम कर देती है।

  • इससे दलहनी पौधों और सहजीवी नाइट्रोजन-स्थिरीकारी जीवाणुओं की गतिविधि दब सकती है।

  • इसलिए नाइट्रोजनी उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग नाइट्रोजन-स्थिरीकारी सूक्ष्मजीवों के प्रचुरोद्भवन का आवश्यक कारण नहीं बनता।

  • अतः कथन 1 गलत है।

  • मृदा में अमोनियम के नाइट्रेट में परिवर्तन की नाइट्रीकरण प्रक्रिया के दौरान हाइड्रोजन आयन उत्पन्न होते हैं।

  • अमोनियम आधारित उर्वरकों के निरंतर तथा अत्यधिक प्रयोग से मृदा का pH घट सकता है और उसकी अम्लता बढ़ सकती है।

  • बढ़ी हुई अम्लता मृदा में पोषक तत्त्वों की उपलब्धता और सूक्ष्मजीवी गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।

  • इसलिए कथन 2 सही है।

  • नाइट्रेट जल में अत्यधिक घुलनशील होता है और मृदा के कणों से मजबूती से नहीं बँधता।

  • वर्षा अथवा अत्यधिक सिंचाई के साथ नाइट्रेट जड़ क्षेत्र से नीचे जाकर भौम जल में पहुँच सकता है।

  • हल्की तथा अधिक जल-निकास वाली मृदाओं में नाइट्रेट निक्षालन का खतरा अधिक हो सकता है।

  • अत्यधिक नाइट्रोजन से सतही जल का सुपोषण, नाइट्रस ऑक्साइड का उत्सर्जन और पेयजल संदूषण भी हो सकता है।

  • इसलिए कथन 3 सही है और सही उत्तर 2 तथा 3 है।

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