Previous Year Question
भारतीय रेल द्वारा उपयोग किए जाने वाले जैव-शौचालयों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
जैव-शौचालयों में मानव अपशिष्ट का अपघटन एक कवकीय इनोकुलम द्वारा प्रारंभ होता है।
इस अपघटन में अमोनिया एवं जल वाष्प ही केवल अंतिम उत्पाद होते हैं जो वायुमंडल में निर्मुक्त होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: D
Detailed Solution
भारतीय रेल के जैव-शौचालय मानव अपशिष्ट के अवायवीय जैविक अपघटन के सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
इस प्रौद्योगिकी को भारतीय रेल ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के सहयोग से अपनाया था।
जैव-शौचालय के बायो-डाइजेस्टर टैंक में अवायवीय जीवाणुओं का सूक्ष्मजीवी समूह उपयोग किया जाता है।
ये जीवाणु ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में मानव मल में उपस्थित जटिल कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं।
अपघटन की प्रक्रिया कवकीय इनोकुलम द्वारा प्रारंभ नहीं होती है।
अवायवीय अपघटन सामान्यतः जल-अपघटन, अम्लजनन, एसीटोजनन और मीथेनजनन जैसे चरणों से होकर पूरा होता है।
जल-अपघटन में जटिल कार्बनिक पदार्थ सरल घुलनशील यौगिकों में परिवर्तित होते हैं।
बाद के चरणों में ये पदार्थ कार्बनिक अम्लों तथा अन्य मध्यवर्ती यौगिकों में परिवर्तित होते हैं।
मीथेनजनक सूक्ष्मजीव अंतिम चरण में इन यौगिकों से मुख्यतः मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करते हैं।
प्रक्रिया से एक तरल बहिःस्राव भी बनता है, जिसे कीटाणुशोधन के बाद बाहर छोड़ा जा सकता है।
इसलिए अमोनिया और जल वाष्प इस अपघटन के केवल अंतिम उत्पाद नहीं हैं।
जैव-शौचालयों का उद्देश्य रेल की पटरियों पर मानव अपशिष्ट के सीधे निर्वहन को रोकना था।
इससे पटरियों के क्षरण, दुर्गंध और अस्वच्छता की समस्या को कम करने में सहायता मिलती है।