Previous Year Question
कुछ कारणोंवश, यदि तितलियों की जातियों की संख्या में बड़ी गिरावट होती है, तो इसका/इसके संभावित परिणाम क्या हो सकता है/सकते हैं?
कुछ पादपों के परागण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कुछ कृष्य पादपों में कवकीय संक्रमण प्रबल रूप से बढ़ सकता है।
इसके कारण बर्रों, मकड़ियों और पक्षियों की कुछ जातियों की संख्या में गिरावट हो सकती है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
केवल 1
2 और 3
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: C
Detailed Solution
तितलियाँ अनेक प्राकृतिक और कृषि पारिस्थितिकी तंत्रों में महत्त्वपूर्ण परागणकर्ता होती हैं।
पुष्पों से मकरंद ग्रहण करते समय परागकण उनके शरीर से चिपक जाते हैं।
दूसरे पुष्प पर जाने पर ये परागकण उसके वर्तिकाग्र तक पहुँच सकते हैं और परागण में सहायता करते हैं।
तितलियों की संख्या में भारी गिरावट से उन पादपों का परागण प्रभावित हो सकता है जो उन पर निर्भर हैं।
इससे ऐसे पादपों में फल और बीज के निर्माण तथा प्राकृतिक पुनर्जनन में कमी आ सकती है।
इसलिए कथन 1 सही है।
तितलियों और उनके लार्वा अर्थात् इल्ली का खाद्य-जाल में भी महत्त्वपूर्ण स्थान होता है।
तितलियों के अंडे, लार्वा, प्यूपा और वयस्क अनेक जीवों के लिए भोजन का स्रोत होते हैं।
बर्रे तितलियों की इल्लियों पर परजीवी अथवा परभक्षी के रूप में निर्भर हो सकते हैं।
मकड़ियाँ वयस्क तितलियों तथा अन्य अवस्थाओं को अपना शिकार बना सकती हैं।
अनेक पक्षी तितलियों और विशेष रूप से उनकी इल्लियों का भोजन के रूप में उपयोग करते हैं।
तितलियों की संख्या में भारी गिरावट से इन पर निर्भर बर्रों, मकड़ियों और पक्षियों के लिए भोजन की उपलब्धता कम हो सकती है।
फलस्वरूप इन जीवों की कुछ जातियों की संख्या भी घट सकती है; इसलिए कथन 3 सही है।
तितलियों की संख्या में गिरावट और कृष्य पादपों में कवकीय संक्रमण की तीव्र वृद्धि के बीच कोई आवश्यक प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
इसलिए कथन 2 गलत है और सही उत्तर 1 तथा 3 है।