JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2019

Previous Year Question

हाल ही में हमारे देश में हिमालयी बिच्छू-बूटी (Girardinia diversifolia) के महत्त्व के बारे में जागरूकता बढ़ रही है, क्योंकि इसे किसका एक धारणीय स्रोत पाया गया है?

A.

मलेरिया-रोधी औषधि

B.

जैव-डीज़ल

C.

कागज उद्योग के लिए लुगदी

D.

वस्त्र तंतु

Correct Answer: D

Detailed Solution

  • Girardinia diversifolia को हिमालयी बिच्छू-बूटी, जायंट हिमालयन नेटल अथवा अल्लो के नाम से जाना जाता है।

  • यह Urticaceae कुल का एक बहुवर्षीय पादप है।

  • इसके तने की छाल से लंबे, मजबूत और हल्के प्राकृतिक बास्ट तंतु प्राप्त होते हैं।

  • इन तंतुओं का उपयोग वस्त्र, रस्सी, थैले, चटाई और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद बनाने में किया जाता है। अतः विकल्प (d) सही है।

  • तंतु निकालने के लिए तनों की कटाई के बाद छाल को अलग करके रेटिंग और प्रसंस्करण किया जाता है।

  • प्रसंस्कृत तंतु को कातकर धागा बनाया जाता है और फिर उससे कपड़ा बुना जाता है।

  • इसके तंतु मजबूत, टिकाऊ और रेशम-सदृश चमक वाले हो सकते हैं।

  • यह हिमालय के नम क्षेत्रों, खुले वनस्थलों, नदी-किनारों और पर्वतीय ढलानों पर उग सकती है।

  • भारत के हिमालयी क्षेत्रों के साथ नेपाल में भी इसके तंतु का पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।

  • बहुवर्षीय होने के कारण कटाई के बाद यह पुनः विकसित हो सकती है।

  • उपयुक्त और नियंत्रित संग्रह से रासायनिक उर्वरक, सिंचाई तथा गहन कृषि निवेश की आवश्यकता कम हो सकती है।

  • इस कारण यह स्थानीय समुदायों के लिए धारणीय प्राकृतिक तंतु और आजीविका का स्रोत बन सकती है।

  • अत्यधिक अथवा अव्यवस्थित कटाई से प्राकृतिक आबादी को हानि हो सकती है, इसलिए वैज्ञानिक संग्रह और पुनर्जनन आवश्यक हैं।

  • इसका प्रमुख उल्लिखित उपयोग मलेरिया-रोधी औषधि, जैव-डीज़ल अथवा कागज की लुगदी के स्रोत के रूप में नहीं है।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.