Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
कानून के अनुसार, प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर विद्यमान हैं।
प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 के अंतर्गत चलाए गए प्रतिपूरक वनीकरण कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: A
Detailed Solution
प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 वन भूमि के गैर-वन उपयोग में परिवर्तन के बदले प्राप्त धन के प्रबंधन से संबंधित है।
यह अधिनियम वर्ष 2016 में पारित हुआ और इसके अंतर्गत प्रतिपूरक वनीकरण निधि नियम, 2018 बनाए गए।
अधिनियम राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि और प्रत्येक राज्य के लिए राज्य प्रतिपूरक वनीकरण निधि स्थापित करता है।
इन निधियों के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण गठित किए गए हैं। अतः कथन 1 सही है।
इन प्राधिकरणों को सामान्यतः राष्ट्रीय CAMPA और राज्य CAMPA कहा जाता है।
गैर-वन उपयोग के लिए वन भूमि प्राप्त करने वाली उपयोगकर्ता एजेंसियों से प्रतिपूरक वनीकरण और अन्य मदों के लिए धन लिया जाता है।
एकत्रित राशि में प्रतिपूरक वनीकरण की लागत, निवल वर्तमान मूल्य और वन संरक्षण से संबंधित अन्य भुगतान शामिल हो सकते हैं।
अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त धन का 90 प्रतिशत संबंधित राज्य निधि और 10 प्रतिशत राष्ट्रीय निधि में जमा किया जाता है।
निधि का उपयोग प्रतिपूरक वनीकरण, प्राकृतिक पुनर्जनन, वन संरक्षण, वनाग्नि नियंत्रण और मृदा तथा जल संरक्षण जैसे कार्यों में किया जा सकता है।
इसका उपयोग वन्यजीव संरक्षण, पर्यावास सुधार और वनों से संबंधित आधारभूत क्षमता के विकास में भी किया जा सकता है।
प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 प्रत्येक कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी को स्पष्ट रूप से अनिवार्य नहीं बनाता। अतः कथन 2 सही नहीं है।
ग्राम सभा अथवा स्थानीय समुदायों की भूमिका अन्य कानूनों, विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम और परियोजना-विशिष्ट प्रक्रियाओं से उत्पन्न हो सकती है।
प्रतिपूरक वनीकरण का उद्देश्य परिवर्तित वन भूमि की पारिस्थितिक क्षति की भरपाई करना है, लेकिन नया वृक्षारोपण प्राकृतिक वन की सभी पारिस्थितिक विशेषताओं को तुरंत प्रतिस्थापित नहीं कर सकता।
इसलिए परियोजनाओं में वन भूमि परिवर्तन से बचाव और उसे न्यूनतम रखना प्राथमिकता होनी चाहिए।