Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) द्वारा भारत के 36% जिलों को ‘अतिदोहित’ अथवा ‘क्रांतिक’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
CGWA का गठन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत किया गया था।
विश्व में भूजल सिंचाई के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्र भारत में है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
2 और 3
केवल 2
1 और 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
भारत में भूजल संसाधनों का आकलन सामान्यतः जिलों के स्थान पर ब्लॉक, तालुका, मंडल अथवा अन्य निर्धारित आकलन इकाइयों के आधार पर किया जाता है।
इन इकाइयों को सुरक्षित, अर्ध-क्रांतिक, क्रांतिक, अतिदोहित और लवणीय जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
राष्ट्रीय भूजल आकलन केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा राज्यों और अन्य संबंधित संस्थाओं के सहयोग से किया जाता है।
इसलिए भारत के 36% जिलों को CGWA द्वारा क्रांतिक अथवा अतिदोहित घोषित करने वाला कथन सही नहीं है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
केंद्रीय भूजल प्राधिकरण का गठन केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3(3) के अंतर्गत किया था।
इसका गठन 14 जनवरी, 1997 की अधिसूचना द्वारा किया गया।
इसका उद्देश्य देश में भूजल संसाधनों के विकास और प्रबंधन का विनियमन तथा नियंत्रण करना है। अतः कथन 2 सही है।
CGWA निर्धारित क्षेत्रों और परियोजनाओं में भूजल निष्कर्षण को विनियमित करता है और आवश्यक शर्तों के साथ अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर सकता है।
केंद्रीय भूजल प्राधिकरण का विनियामक कार्य केंद्रीय भूजल बोर्ड के वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यों से अलग है।
भारत विश्व में भूजल का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है।
भारत में सिंचाई का एक बहुत बड़ा भाग नलकूपों और कुओं से प्राप्त भूजल पर निर्भर है।
विश्व में भूजल सिंचाई के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्र भारत में है। अतः कथन 3 सही है।
भूजल सिंचाई ने खाद्य उत्पादन में वृद्धि की है, लेकिन अनियंत्रित दोहन से जलस्तर में गिरावट हो सकती है।
अत्यधिक दोहन के परिणामों में कुओं का सूखना, पंपिंग लागत में वृद्धि, जल गुणवत्ता में गिरावट, लवणीय जल का प्रवेश और भूमि धँसाव शामिल हो सकते हैं।
वर्षाजल संचयन, कृत्रिम पुनर्भरण, सूक्ष्म सिंचाई, उपयुक्त फसल चयन और भूजल निष्कर्षण का विनियमन इसके धारणीय प्रबंधन के प्रमुख उपाय हैं।