Previous Year Question
भारत की जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति के अनुसार, निम्नलिखित में से किसका उपयोग जैव ईंधनों के उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में किया जा सकता है?
कसावा
क्षतिग्रस्त गेहूँ के दाने
मूँगफली के बीज
कुलथी
सड़े हुए आलू
चुकंदर
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
1, 2, 5 और 6
1, 3, 4 और 6
2, 3, 4 और 5
1, 2, 3, 4, 5 और 6
Correct Answer: A
Detailed Solution
जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2018 ने इथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमत कच्चे माल का दायरा बढ़ाया।
नीति में शर्करा-युक्त, स्टार्च-युक्त और सेल्यूलोसिक पदार्थों से जैव-इथेनॉल के उत्पादन का प्रावधान किया गया।
कसावा एक स्टार्च-युक्त फसल है और इसका उपयोग इथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा सकता है। अतः मद 1 सही है।
मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों का उपयोग इथेनॉल उत्पादन में किया जा सकता है।
इसलिए क्षतिग्रस्त गेहूँ के दाने अनुमत कच्चे माल में शामिल हैं। अतः मद 2 सही है।
सड़े हुए और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त आलू में उपस्थित स्टार्च का उपयोग इथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा सकता है। अतः मद 5 सही है।
चुकंदर में किण्वन-योग्य शर्करा होती है और यह इथेनॉल उत्पादन का कच्चा माल हो सकता है। अतः मद 6 सही है।
शर्करा-युक्त कच्चे माल में गन्ने का रस, चुकंदर और मीठा ज्वार भी शामिल हो सकते हैं।
स्टार्च-युक्त कच्चे माल में मक्का, कसावा, क्षतिग्रस्त गेहूँ, टूटा चावल और सड़े हुए आलू शामिल हो सकते हैं।
खोई, कृषि-अवशेष, वानिकी-अवशेष और लकड़ी का अपशिष्ट सेल्यूलोसिक इथेनॉल के कच्चे माल हो सकते हैं।
मूँगफली एक खाद्य तिलहन है और प्रश्न में उल्लिखित नीति के अनुमत इथेनॉल कच्चे माल की सूची में शामिल नहीं है। अतः मद 3 सही नहीं है।
कुलथी एक दलहनी फसल है और इसे भी इस उद्देश्य के लिए अनुमत कच्चे माल में सूचीबद्ध नहीं किया गया है। अतः मद 4 सही नहीं है।
प्रथम पीढ़ी का इथेनॉल मुख्यतः शर्करा और स्टार्च वाली फसलों से बनाया जाता है।
द्वितीय पीढ़ी का इथेनॉल कृषि-अवशेषों और लिग्नोसेल्यूलोसिक जैवमात्रा से बनाया जाता है।
अनुपयुक्त अथवा क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों का उपयोग खाद्य अपशिष्ट कम करने और ईंधन उत्पादन बढ़ाने में सहायता कर सकता है, लेकिन खाद्य सुरक्षा की रक्षा आवश्यक है।