Previous Year Question
कृषि में शून्य जुताई का/के क्या लाभ है/हैं?
पिछली फसल के अवशेष को जलाए बिना गेहूँ की बुआई संभव है।
धान के पौधों की नर्सरी की आवश्यकता के बिना, गीली मृदा में धान के बीजों की सीधी बुआई संभव है।
मृदा में कार्बन प्रच्छादन संभव है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
1 और 2
2 और 3
केवल 3
1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Solution
शून्य जुताई में फसल की बुआई से पहले खेत को परंपरागत रूप से जोता या उलटा नहीं जाता।
विशेष सीड ड्रिल द्वारा बीज और उर्वरक को न्यूनतम मृदा विक्षोभ के साथ सीधे भूमि में डाला जाता है।
धान की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों के बीच हैप्पी सीडर जैसे यंत्र से गेहूँ की सीधी बुआई की जा सकती है।
इससे पिछली फसल के अवशेष को जलाने की आवश्यकता कम होती है। अतः कथन 1 सही है।
फसल अवशेष सतह पर मल्च के रूप में रहकर मृदा की नमी बचाने और खरपतवारों की वृद्धि सीमित करने में सहायता कर सकते हैं।
शून्य जुताई के अंतर्गत उपयुक्त मशीन से गीली मृदा में धान के बीजों की सीधी बुआई की जा सकती है।
इस प्रत्यक्ष बीजारोपित धान पद्धति में पौधशाला तैयार करने और पौधों का रोपण करने की आवश्यकता नहीं होती। अतः कथन 2 सही है।
जुताई कम होने से मृदा के समुच्चय और उसमें उपस्थित कार्बनिक पदार्थ का विघटन धीमा हो सकता है।
फसल अवशेषों को खेत में बनाए रखने से मृदा में कार्बनिक कार्बन की मात्रा बढ़ सकती है।
इसलिए उपयुक्त प्रबंधन के साथ शून्य जुताई मृदा में कार्बन प्रच्छादन में योगदान दे सकती है। अतः कथन 3 सही है।
यह मृदा अपरदन, जल अपवाह और नमी की हानि को कम करने में भी सहायता कर सकती है।
इससे ट्रैक्टर के उपयोग, ईंधन की खपत, श्रम, लागत और बुआई में लगने वाला समय कम हो सकता है।
शून्य जुताई संरक्षण कृषि का एक घटक है; अन्य घटक स्थायी मृदा आवरण और विविध फसल चक्र हैं।
इसके प्रभाव मृदा के प्रकार, जलवायु, अवशेष प्रबंधन, फसल चक्र और समयावधि पर निर्भर करते हैं।
संभावित चुनौतियों में खरपतवार नियंत्रण, विशेष मशीनों की आवश्यकता और अनुचित प्रबंधन की स्थिति में कीट तथा रोग शामिल हैं।