JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2020

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. कोयले की राख में आर्सेनिक, सीसा और पारा होता है।

  2. कोयला-चालित विद्युत संयंत्र पर्यावरण में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड छोड़ते हैं।

  3. भारतीय कोयले में राख की उच्च मात्रा पाई जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1

B.

2 और 3

C.

केवल 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: D

Detailed Solution

  • कोयले के दहन से मुख्यतः फ्लाई ऐश और बॉटम ऐश के रूप में ठोस अवशेष उत्पन्न होते हैं।

  • कोयले की राख में सिलिका, ऐलुमिना और लौह ऑक्साइड के साथ आर्सेनिक, सीसा तथा पारा जैसी विषैली धातुएँ हो सकती हैं। अतः कथन 1 सही है।

  • इसमें कैडमियम, क्रोमियम और सेलेनियम जैसे अन्य सूक्ष्म प्रदूषक भी उपस्थित हो सकते हैं।

  • राख के अनुचित भंडारण से ये प्रदूषक निक्षालित होकर मृदा, सतही जल और भूजल में पहुँच सकते हैं।

  • सूखी फ्लाई ऐश के सूक्ष्म कण वायु में फैलकर श्वसन संबंधी समस्याएँ भी उत्पन्न कर सकते हैं।

  • कोयले में उपस्थित सल्फर दहन के दौरान ऑक्सीकृत होकर मुख्यतः सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है।

  • दहन के उच्च तापमान पर नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की अभिक्रिया से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्पन्न होते हैं।

  • इसलिए कोयला-चालित विद्युत संयंत्र सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड दोनों उत्सर्जित करते हैं। अतः कथन 2 सही है।

  • ये संयंत्र कार्बन डाइऑक्साइड, कणीय पदार्थ और अन्य प्रदूषक भी उत्सर्जित कर सकते हैं।

  • भारतीय कोयला सामान्यतः उच्च राख मात्रा वाला होता है और अनेक मामलों में इसकी राख मात्रा लगभग 30–45 प्रतिशत तक हो सकती है। अतः कथन 3 सही है।

  • आयातित कोयले की तुलना में भारतीय कोयले में प्रायः राख अधिक और ऊष्मीय मान कम होता है।

  • उच्च राख मात्रा के कारण समान ऊर्जा उत्पादन के लिए अधिक कोयले की आवश्यकता और अधिक राख का प्रबंधन करना पड़ सकता है।

  • इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर द्वारा फ्लाई ऐश कणों को निकास गैसों से अलग किया जा सकता है।

  • फ्लाई ऐश का उपयोग सीमेंट, ईंट, सड़क निर्माण, तटबंध और खदान भराव में किया जा सकता है, बशर्ते पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का पालन हो।

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