Previous Year Question
ताम्र प्रगलन संयंत्रों के बारे में चिंता क्यों है?
वे पर्यावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड की घातक मात्रा छोड़ सकते हैं।
ताम्र धातुमल पर्यावरण में कुछ भारी धातुओं के निक्षालन का कारण बन सकता है।
वे प्रदूषक के रूप में सल्फर डाइऑक्साइड छोड़ सकते हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
1 और 2
2 और 3
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
ताम्र प्रगलन में सांद्रित ताम्र अयस्क को उच्च तापमान पर संसाधित करके तांबा निकाला जाता है।
अनेक प्रमुख ताम्र अयस्क सल्फाइड खनिज होते हैं, जैसे चाल्कोपाइराइट।
इन अयस्कों के भर्जन और प्रगलन के दौरान सल्फर ऑक्सीकृत होकर सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है।
इसलिए ताम्र प्रगलन संयंत्र सल्फर डाइऑक्साइड को वायु प्रदूषक के रूप में उत्सर्जित कर सकते हैं। अतः कथन 3 सही है।
सल्फर डाइऑक्साइड श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकती है और वायुमंडल में सल्फेट सूक्ष्म कणों तथा अम्लीय वर्षा के निर्माण में योगदान देती है।
प्रगलन के दौरान अयस्क के अवांछित खनिज और फ्लक्स मिलकर धातुमल बनाते हैं।
ताम्र धातुमल में लौह और सिलिका के साथ सीसा, आर्सेनिक, कैडमियम तथा अन्य धातुओं की अवशिष्ट मात्रा हो सकती है।
अनुचित भंडारण अथवा निपटान की स्थिति में वर्षाजल इन धातुओं का निक्षालन करके उन्हें मृदा और जल में पहुँचा सकता है।
इसलिए ताम्र धातुमल से भारी धातुओं के निक्षालन से संबंधित कथन 2 सही है।
ताम्र प्रगलन से धूल, सूक्ष्म कण और धातु युक्त उत्सर्जन भी उत्पन्न हो सकते हैं।
कार्बन मोनोऑक्साइड अपूर्ण दहन से बन सकती है, लेकिन ताम्र प्रगलन संयंत्रों द्वारा पर्यावरण में उसकी ‘घातक मात्रा’ छोड़ना इस उद्योग की सामान्य और विशिष्ट चिंता नहीं है।
इसलिए कथन 1 सही नहीं है।
सल्फर डाइऑक्साइड को पकड़कर सल्फ्यूरिक अम्ल में परिवर्तित करने से वायु उत्सर्जन कम किया जा सकता है।
धातुमल के सुरक्षित भंडारण, निक्षालन परीक्षण, धातु पुनर्प्राप्ति और वैज्ञानिक निपटान से मृदा तथा जल प्रदूषण का जोखिम घटाया जा सकता है।