JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2011

Previous Year Question

भारत के संदर्भ में निम्नलिखित केंद्रीय अधिनियमों पर विचार कीजिए :

  1. आयात और निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1947

  2. खनन और खनिज विकास (विनियमन) अधिनियम, 1957

  3. सीमा शुल्क अधिनियम, 1962

  4. भारतीय वन अधिनियम, 1927

उपर्युक्त में से किन अधिनियमों की देश में जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रासंगिकता/प्रभाव है?

A.

1 और 3

B.

2, 3 और 4

C.

1, 2, 3 और 4

D.

इनमें से कोई नहीं

Correct Answer: C

Detailed Solution

  • जैव विविधता संरक्षण केवल जैव विविधता अधिनियम अथवा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम तक सीमित नहीं है; अनेक क्षेत्रीय कानून भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसे प्रभावित करते हैं।

  • आयात और निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1947 के अंतर्गत वस्तुओं के आयात और निर्यात पर प्रतिबंध अथवा नियंत्रण लगाया जा सकता था।

  • ऐसे व्यापारिक नियंत्रणों का उपयोग वन्यजीवों, वन्यजीव उत्पादों, संकटापन्न प्रजातियों और कुछ जैविक संसाधनों के अनधिकृत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को रोकने के लिए किया जा सकता था।

  • इस प्रकार आयात-निर्यात नियंत्रण का जैव विविधता संरक्षण पर प्रभाव था।

  • खनन और खनिज विकास (विनियमन) अधिनियम, 1957 खनिजों के विकास और खनन गतिविधियों के विनियमन का आधार प्रदान करता है।

  • खनन से वनों की कटाई, पर्यावास विखंडन, मृदा क्षरण, जल प्रदूषण और वन्यजीवों का विस्थापन हो सकता है।

  • इसलिए खनन-स्थलों, पट्टों और खनन गतिविधियों का विनियमन जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रासंगिक है।

  • सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 आयातित और निर्यातित वस्तुओं पर प्रतिबंधों तथा सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के प्रवर्तन का आधार प्रदान करता है।

  • सीमा शुल्क अधिकारी प्रतिबंधित वन्यजीवों, पादपों और उनसे निर्मित उत्पादों की अवैध सीमापार तस्करी का पता लगाने और उन्हें जब्त करने में भूमिका निभाते हैं।

  • यह व्यवस्था CITES और घरेलू वन्यजीव कानूनों के व्यापार संबंधी प्रावधानों के प्रवर्तन में सहायता करती है।

  • भारतीय वन अधिनियम, 1927 आरक्षित वनों, संरक्षित वनों और ग्राम वनों से संबंधित प्रावधान करता है।

  • यह वन उपज के दोहन, परिवहन और व्यापार को विनियमित करने तथा वन अपराधों को नियंत्रित करने का आधार प्रदान करता है।

  • वन क्षेत्रों और वन उपज के विनियमन का वन पर्यावासों तथा उनमें पाई जाने वाली जैव विविधता पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।

  • इन अधिनियमों के साथ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और जैव विविधता अधिनियम, 2002 भी भारत के व्यापक जैव विविधता संरक्षण ढाँचे का भाग हैं।

  • अतः सूचीबद्ध चारों अधिनियमों की जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रासंगिकता है।

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