Previous Year Question
‘पारितंत्र एवं जैव विविधता का अर्थशास्त्र’ (TEEB) नामक पहल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
यह UNEP, IMF और विश्व आर्थिक मंच द्वारा आयोजित पहल है।
यह एक वैश्विक पहल है, जो जैव विविधता के आर्थिक लाभों की ओर ध्यान आकर्षित करने पर केंद्रित है।
यह ऐसा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो निर्णयकर्ताओं को पारितंत्रों और जैव विविधता के मूल्य को पहचानने, प्रदर्शित करने और प्राप्त करने में सहायता दे सकता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
1 और 2
केवल 3
2 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: C
Detailed Solution
TEEB का पूर्ण रूप ‘The Economics of Ecosystems and Biodiversity’ है।
यह प्रकृति और जैव विविधता द्वारा प्रदान किए जाने वाले आर्थिक लाभों को निर्णय-निर्माण में शामिल करने से संबंधित वैश्विक पहल है।
TEEB को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा आयोजित किया जाता है; IMF और विश्व आर्थिक मंच इसके संयुक्त आयोजक नहीं हैं। अतः कथन 1 सही नहीं है।
TEEB अध्ययन की शुरुआत जर्मनी और यूरोपीय आयोग की पहल पर वर्ष 2007 में पॉट्सडैम में हुई G8+5 पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के बाद हुई थी।
इसका उद्देश्य जैव विविधता की हानि और पारितंत्रों के क्षरण से उत्पन्न आर्थिक लागत को स्पष्ट करना है।
यह परागण, जल शुद्धीकरण, जलवायु विनियमन, मृदा निर्माण और बाढ़ नियंत्रण जैसी पारितंत्र सेवाओं के आर्थिक महत्त्व की ओर ध्यान आकर्षित करता है।
इसलिए TEEB जैव विविधता के आर्थिक लाभों पर केंद्रित वैश्विक पहल है। अतः कथन 2 सही है।
TEEB का दृष्टिकोण प्रकृति के मूल्य को ‘पहचानने, प्रदर्शित करने और प्राप्त करने’ पर आधारित है।
‘पहचानने’ का अर्थ पारितंत्रों और जैव विविधता द्वारा प्रदान किए जाने वाले अनेक प्रकार के मूल्यों को समझना है।
‘प्रदर्शित करने’ का अर्थ उपयुक्त परिस्थितियों में इन मूल्यों को आर्थिक अथवा अन्य मापनीय रूप में प्रस्तुत करना है।
‘प्राप्त करने’ का अर्थ इन मूल्यों को नीतियों, प्रोत्साहनों, बाज़ार-व्यवस्थाओं और निर्णय-प्रक्रियाओं में सम्मिलित करना है।
यह दृष्टिकोण सरकारों, व्यवसायों, स्थानीय निकायों और नागरिकों को प्रकृति के क्षरण की छिपी हुई लागत समझने में सहायता करता है। अतः कथन 3 सही है।
TEEB का उद्देश्य प्रकृति की प्रत्येक सेवा को बाज़ार में बेचने योग्य बनाना नहीं, बल्कि निर्णयों में उसके उपेक्षित मूल्य को शामिल करना है।
यह प्राकृतिक पूँजी और पारितंत्र सेवाओं को आर्थिक नियोजन तथा विकास नीति से जोड़ता है।