Previous Year Question
‘गाडगिल समिति रिपोर्ट’ और ‘कस्तूरीरंगन समिति रिपोर्ट’, जिनका कभी-कभी समाचारों में उल्लेख होता है, निम्नलिखित में से किससे संबंधित हैं?
सांविधानिक सुधार
गंगा कार्ययोजना
नदियों को जोड़ना
पश्चिमी घाटों का संरक्षण
Correct Answer: D
Detailed Solution
गाडगिल समिति और कस्तूरीरंगन समिति दोनों का संबंध पश्चिमी घाटों के पारिस्थितिक संरक्षण और विकास संबंधी गतिविधियों के विनियमन से है।
पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल का गठन वर्ष 2010 में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा किया गया था।
इस पैनल के अध्यक्ष पारिस्थितिकीविद् प्रोफेसर माधव गाडगिल थे; इसलिए इसे गाडगिल समिति कहा जाता है।
पैनल ने 31 अगस्त, 2011 को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को प्रस्तुत की।
गाडगिल समिति ने संपूर्ण पश्चिमी घाट को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र मानने की सिफारिश की।
इसने पश्चिमी घाट को पारिस्थितिक संवेदनशीलता के आधार पर ESZ-1, ESZ-2 और ESZ-3 श्रेणियों में विभाजित करने का सुझाव दिया।
ESZ-1 को सर्वाधिक संवेदनशील श्रेणी माना गया और इसमें खनन तथा अत्यधिक प्रदूषणकारी गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंधों की सिफारिश की गई।
समिति ने स्थानीय निकायों और ग्राम सभाओं की भागीदारी पर आधारित विकेंद्रीकृत तथा नीचे से ऊपर की ओर संरक्षण व्यवस्था पर बल दिया।
गाडगिल रिपोर्ट की समीक्षा के लिए वर्ष 2012 में डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कार्यसमूह गठित किया गया।
कस्तूरीरंगन समिति ने पश्चिमी घाट के भू-दृश्य को प्राकृतिक भू-दृश्य और सांस्कृतिक भू-दृश्य में विभाजित किया।
इसने लगभग 37 प्रतिशत प्राकृतिक भू-दृश्य, लगभग 59,940 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित करने की सिफारिश की।
प्रस्तावित संवेदनशील क्षेत्र में खनन, उत्खनन, ताप विद्युत परियोजनाओं और अत्यधिक प्रदूषणकारी ‘रेड’ श्रेणी के उद्योगों पर प्रतिबंध की सिफारिश की गई।
गाडगिल समिति की तुलना में कस्तूरीरंगन समिति ने संरक्षण के लिए अपेक्षाकृत छोटा क्षेत्र प्रस्तावित किया और विकास तथा संरक्षण के बीच संतुलन पर अधिक बल दिया।
पश्चिमी घाट गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में विस्तृत हैं तथा विश्व के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉटों में शामिल हैं।