Previous Year Question
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अनुसार, निम्नलिखित में से किन पशुओं का, विधि द्वारा उपबंधित कुछ प्रावधानों के अंतर्गत छोड़कर, किसी भी व्यक्ति द्वारा शिकार नहीं किया जा सकता?
घड़ियाल
भारतीय वन्य गधा
वन्य भैंसा
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
केवल 1
2 और 3
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Solution
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9 संरक्षित वन्य पशुओं के शिकार पर प्रतिबंध लगाती है।
प्रश्न पूछे जाने के समय घड़ियाल, भारतीय वन्य गधा और वन्य भैंसा तीनों अधिनियम की अनुसूची I में सम्मिलित थे।
इसलिए अधिनियम में निर्धारित अपवादों को छोड़कर इन तीनों का किसी भी व्यक्ति द्वारा शिकार नहीं किया जा सकता था।
अधिनियम के अंतर्गत ‘शिकार’ में मारने के साथ पकड़ना, विष देना, फँसाना, घायल करना और ऐसा करने का प्रयास भी शामिल हो सकता है।
घड़ियाल मुख्यतः नदी में रहने वाला मत्स्यभक्षी मगरमच्छ-सदृश सरीसृप है।
भारत में इसकी महत्त्वपूर्ण आबादियाँ चंबल और उसकी संबद्ध नदी प्रणालियों में पाई जाती हैं।
घड़ियाल संरक्षण के लिए भारत में मगरमच्छ संरक्षण परियोजना वर्ष 1975 में प्रारंभ की गई थी।
भारतीय वन्य गधा एशियाई वन्य गधे की एक उप-प्रजाति है और इसकी प्रमुख आबादी गुजरात के कच्छ के छोटे रण में पाई जाती है।
भारतीय वन्य गधा अभयारण्य गुजरात में इस प्रजाति के प्रमुख पर्यावास की रक्षा करता है।
वन्य भैंसा घरेलू भैंसे से अलग एक वन्य प्रजाति है और भारत में इसकी प्रमुख आबादियाँ मध्य तथा पूर्वोत्तर क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
वन्य भैंसे के लिए आवासीय हानि, रोग-संचरण और घरेलू भैंसों के साथ संकरण प्रमुख खतरे हैं।
अधिनियम की धारा 11 के अंतर्गत मानव जीवन के लिए खतरनाक हो चुके अथवा असाध्य रूप से रोगग्रस्त या अशक्त पशु के संबंध में निर्धारित परिस्थितियों में कार्रवाई की जा सकती है।
धारा 12 शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, वैज्ञानिक प्रबंधन और निर्धारित अन्य उद्देश्यों के लिए विशेष अनुमति से संबंधित थी।
आत्मरक्षा में सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए भी अधिनियम में सीमित अपवाद का प्रावधान है।
अतः घड़ियाल, भारतीय वन्य गधा और वन्य भैंसा तीनों सही हैं।