JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2017

Previous Year Question

भारत में, यदि कछुए की किसी प्रजाति को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के अंतर्गत संरक्षित घोषित किया गया हो, तो इसका निहितार्थ क्या है?

A.

इसे बाघ के समान संरक्षण प्राप्त है।

B.

इसका अब वन्य अवस्था में अस्तित्व नहीं है, कुछ ही जीव बंदी संरक्षण में हैं और अब इसके विलुप्त होने को रोकना असंभव है।

C.

यह भारत के किसी विशिष्ट क्षेत्र के लिए स्थानिक है।

D.

इस संदर्भ में उपर्युक्त (b) और (c) दोनों सही हैं।

Correct Answer: A

Detailed Solution

  • यह प्रश्न वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में वर्ष 2022 के संशोधन से पहले विद्यमान अनुसूचियों पर आधारित है।

  • उस व्यवस्था में अनुसूची I में सम्मिलित वन्यजीवों को अधिनियम के अंतर्गत उच्चतम स्तर का वैधानिक संरक्षण प्राप्त था।

  • बाघ भी अनुसूची I में सम्मिलित था; इसलिए अनुसूची I में रखा गया कछुआ संरक्षण के समान वैधानिक स्तर का हकदार था।

  • अनुसूची I की प्रजातियों का शिकार अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत निषिद्ध था।

  • केवल अधिनियम में निर्धारित असाधारण परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से संबंधित वन्यजीव को पकड़ा अथवा मारा जा सकता था।

  • इन प्रजातियों से संबंधित अपराधों के लिए अन्य अनुसूचियों की तुलना में अधिक कठोर दंड का प्रावधान था।

  • अनुसूची I का संरक्षण किसी प्रजाति के कब्जे, परिवहन, व्यापार तथा उससे प्राप्त वस्तुओं पर भी कड़े नियंत्रण से संबंधित था।

  • अनुसूची I में सूचीबद्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रजाति वन्य अवस्था से विलुप्त हो चुकी है। अतः विकल्प (b) सही नहीं है।

  • अनुसूची I में सूचीबद्ध होना किसी प्रजाति के भारत के किसी विशिष्ट क्षेत्र में स्थानिक होने का प्रमाण भी नहीं है। अतः विकल्प (c) सही नहीं है।

  • वैधानिक संरक्षण की अनुसूची और IUCN की संरक्षण-स्थिति दो अलग-अलग वर्गीकरण व्यवस्थाएँ हैं।

  • वन्यजीव संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 ने अनुसूचियों का पुनर्गठन किया, लेकिन अनुसूची I अब भी उच्चतम संरक्षण की आवश्यकता वाली पशु प्रजातियों से संबंधित है।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.