Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
भारतीय पेटेंट अधिनियम के अनुसार, बीज बनाने की जैविक प्रक्रिया का भारत में पेटेंट कराया जा सकता है।
भारत में कोई बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड नहीं है।
भारत में पादप किस्में पेटेंट कराए जाने की पात्र नहीं हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
1 और 3
2 और 3
केवल 3
1, 2 और 3
Correct Answer: C
Detailed Solution
पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 3 उन विषयों को निर्धारित करती है जिन्हें आविष्कार नहीं माना जाता और जिनका पेटेंट नहीं कराया जा सकता।
धारा 3(j) के अंतर्गत सूक्ष्मजीवों को छोड़कर पादप और पशु, पूर्णतः अथवा उनके किसी भाग को पेटेंट से बाहर रखा गया है।
बीज, पादप किस्में, प्रजातियाँ और पादपों तथा पशुओं के उत्पादन या प्रवर्धन की मूलतः जैविक प्रक्रियाएँ भी पेटेंट योग्य नहीं हैं।
इसलिए बीज बनाने की जैविक प्रक्रिया का भारत में पेटेंट नहीं कराया जा सकता। अतः कथन 1 सही नहीं है।
सूक्ष्मजीव और कुछ सूक्ष्मजीवी अथवा जैव-प्रौद्योगिकीय प्रक्रियाएँ अन्य पेटेंट-योग्यता शर्तें पूरी करने पर पेटेंट के लिए पात्र हो सकती हैं।
प्रश्न पूछे जाने के समय भारत में बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) अस्तित्व में था। अतः कथन 2 सही नहीं है।
IPAB पेटेंट नियंत्रक के कुछ निर्णयों सहित बौद्धिक संपदा संबंधी मामलों की अपीलों की सुनवाई करता था।
बाद में न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 के माध्यम से IPAB को समाप्त कर दिया गया और उसके कार्य संबंधित उच्च न्यायालयों को हस्तांतरित कर दिए गए।
भारत में पादप किस्मों का पेटेंट नहीं कराया जा सकता। अतः कथन 3 सही है।
पादप किस्मों को पेटेंट के स्थान पर पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत अलग प्रकार का विधिक संरक्षण मिलता है।
यह भारत की विशिष्ट अथवा ‘सुई जेनेरिस’ पादप किस्म संरक्षण व्यवस्था है।
यह अधिनियम पादप प्रजनकों के अधिकारों के साथ कृषकों और शोधकर्ताओं के अधिकारों को भी मान्यता देता है।
कृषकों को निर्धारित शर्तों के अधीन बीज सुरक्षित रखने, उपयोग करने, बोने, पुनः बोने, विनिमय करने और साझा करने जैसे अधिकार दिए गए हैं।