JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2019

Previous Year Question

भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?

A.

अपशिष्ट उत्पादक को अपशिष्ट को पाँच श्रेणियों में अलग-अलग करना होता है।

B.

ये नियम केवल अधिसूचित नगरीय स्थानीय निकायों, अधिसूचित नगरों और सभी औद्योगिक नगरों पर लागू होते हैं।

C.

इन नियमों में भराव-स्थलों और अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं के लिए स्थलों की पहचान हेतु सटीक और विस्तृत मानदंड दिए गए हैं।

D.

अपशिष्ट उत्पादक के लिए यह अनिवार्य है कि एक जिले में उत्पन्न अपशिष्ट को दूसरे जिले में नहीं ले जाया जा सकता।

Correct Answer: C

Detailed Solution

  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अधीन अधिसूचित किया गया था।

  • इन नियमों ने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन एवं हथालन) नियम, 2000 का स्थान लिया।

  • नियमों के अनुसार अपशिष्ट उत्पादक को अपशिष्ट को तीन अलग-अलग धाराओं—जैव-निम्नीकरणीय, गैर-जैव-निम्नीकरणीय और घरेलू परिसंकटमय अपशिष्ट—में पृथक करना होता है।

  • इसलिए अपशिष्ट को पाँच श्रेणियों में अलग करने वाला विकल्प (a) सही नहीं है।

  • इन नियमों का क्षेत्र केवल अधिसूचित नगरीय स्थानीय निकायों, नगरों और औद्योगिक नगरों तक सीमित नहीं है।

  • ये जनगणना नगरों, अधिसूचित क्षेत्रों, औद्योगिक नगरों, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, रक्षा प्रतिष्ठानों, विशेष आर्थिक क्षेत्रों और तीर्थस्थलों सहित अनेक क्षेत्रों पर लागू होते हैं।

  • इसलिए विकल्प (b) में प्रयुक्त ‘केवल’ शब्द इसे गलत बनाता है।

  • नियमों में अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं और स्वच्छ भराव-स्थलों के लिए स्थान के चयन से संबंधित विस्तृत मानदंड दिए गए हैं। अतः विकल्प (c) सही है।

  • स्थल-चयन में बस्तियों, जल निकायों, वन क्षेत्रों, बाढ़ मैदानों, भूजल और हवाई अड्डों से सुरक्षित दूरी जैसे कारकों पर विचार किया जाता है।

  • भराव-स्थल की संरचना ऐसी होनी चाहिए कि निक्षालित द्रव से मृदा और भूजल का प्रदूषण रोका जा सके।

  • अपशिष्ट के एक जिले से दूसरे जिले में परिवहन पर कोई सार्वभौमिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

  • क्षेत्रीय अथवा साझा प्रसंस्करण और भराव सुविधाएँ एक से अधिक नगरीय स्थानीय निकायों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती हैं। अतः विकल्प (d) सही नहीं है।

  • नियम अपशिष्ट के स्रोत पर पृथक्करण, संग्रह, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण, कम्पोस्टिंग और वैज्ञानिक निपटान को प्राथमिकता देते हैं।

  • भराव-स्थल का उपयोग मुख्यतः ऐसे अवशिष्ट अपशिष्ट के लिए किया जाना चाहिए जिसे पुनर्चक्रित अथवा प्रसंस्कृत नहीं किया जा सकता।

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