JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2020

Previous Year Question

यदि किसी विशिष्ट पादप प्रजाति को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची VI के अधीन रखा गया है, तो इसका क्या तात्पर्य है?

A.

उस पादप की खेती करने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता है।

B.

ऐसे पादप की खेती किसी भी परिस्थिति में नहीं हो सकती।

C.

यह आनुवंशिक रूप से रूपांतरित फसली पादप है।

D.

ऐसा पादप आक्रामक और पारितंत्र के लिए हानिकारक है।

Correct Answer: A

Detailed Solution

  • यह प्रश्न वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में वर्ष 2022 के संशोधन से पहले प्रचलित अनुसूचियों पर आधारित है।

  • उस समय अधिनियम की अनुसूची VI में निर्दिष्ट संरक्षित पादप प्रजातियाँ रखी गई थीं।

  • अधिनियम की धारा 17C के अनुसार अनुसूची VI में सम्मिलित किसी निर्दिष्ट पादप की खेती बिना लाइसेंस के नहीं की जा सकती थी।

  • ऐसा लाइसेंस मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी प्रदान करता था।

  • लाइसेंस में खेती के क्षेत्र, अवधि और पालन की जाने वाली शर्तों का उल्लेख किया जा सकता था।

  • इसका अर्थ पादप की खेती पर प्रत्येक परिस्थिति में पूर्ण प्रतिबंध नहीं था; वैध लाइसेंस के अधीन खेती संभव थी।

  • अधिनियम बिना अनुमति संरक्षित पादप को तोड़ने, उखाड़ने, क्षति पहुँचाने, प्राप्त करने अथवा एकत्र करने पर भी प्रतिबंध लगाता था।

  • अनुसूची VI के पादपों के व्यापार और कब्जे के लिए भी अधिनियम के अंतर्गत नियंत्रण तथा अनुमति संबंधी प्रावधान लागू होते थे।

  • इसके अंतर्गत बेडडोम साइकैड, ब्लू वांडा, कुथ, लेडीज स्लिपर ऑर्किड, पिचर प्लांट और रेड वांडा जैसे पादप सम्मिलित थे।

  • अनुसूची VI में सम्मिलित होना आनुवंशिक रूप से रूपांतरित फसल होने का संकेत नहीं था। अतः विकल्प (c) सही नहीं है।

  • इन पादपों को आक्रामक और पारितंत्र के लिए हानिकारक होने के कारण सूचीबद्ध नहीं किया गया था। अतः विकल्प (d) सही नहीं है।

  • वन्यजीव संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 ने अनुसूचियों का पुनर्गठन किया और निर्दिष्ट संरक्षित पादपों को अब अनुसूची III में रखा गया है।

  • अतः प्रश्न के समय लागू कानूनी व्यवस्था के अनुसार विकल्प (a) सही उत्तर है।

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