JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2011

Previous Year Question

वर्ष 2004 की सुनामी ने लोगों को यह अनुभव कराया कि मैन्ग्रोव तटीय आपदाओं के विरुद्ध विश्वसनीय सुरक्षा-वाड़ का कार्य कर सकते हैं। मैन्ग्रोव सुरक्षा-वाड़ का कार्य किस प्रकार करते हैं?

A.

मैन्ग्रोव दलदल मानव बस्तियों को समुद्र से एक ऐसे विस्तृत क्षेत्र द्वारा अलग करते हैं जिसमें लोग न तो रहते हैं और न जाते हैं।

B.

मैन्ग्रोव भोजन और औषधियाँ दोनों उपलब्ध कराते हैं, जिनकी लोगों को किसी प्राकृतिक आपदा के बाद आवश्यकता होती है।

C.

मैन्ग्रोव वृक्ष ऊँचे और घने वितान वाले होते हैं तथा चक्रवात या सुनामी के समय उत्कृष्ट आश्रय प्रदान करते हैं।

D.

मैन्ग्रोव वृक्ष अपनी विस्तृत जड़ों के कारण तूफानों और ज्वार से उखड़ते नहीं हैं।

Correct Answer: D

Detailed Solution

  • मैन्ग्रोव उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय तटों, ज्वारनदमुखों तथा डेल्टाओं के अंतर्ज्वारीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले लवण-सहिष्णु वन हैं।

  • इनमें अवस्तम्भ मूल, टेक मूल, श्वसन मूल और घुटना मूल जैसी विशिष्ट जड़ें पाई जाती हैं।

  • इनका विस्तृत जड़-तंत्र वृक्षों को मुलायम और जलसंतृप्त तटीय अवसादों में दृढ़ता से स्थापित रखता है।

  • इस कारण मैन्ग्रोव वृक्ष तूफानों, समुद्री लहरों और ज्वार के प्रभाव से आसानी से नहीं उखड़ते हैं।

  • जड़ों, तनों और शाखाओं का सघन जाल जल के प्रवाह में घर्षण उत्पन्न करके लहरों की गति और ऊर्जा को कम करता है।

  • मैन्ग्रोव तूफानी ज्वार और सुनामी की लहरों के प्रभाव को कम करने के साथ तटीय अपरदन को भी नियंत्रित करते हैं।

  • इनकी जड़ें अवसादों को रोकती हैं और तटरेखा को स्थिर बनाने में सहायता करती हैं।

  • विकल्प (a) सही नहीं है, क्योंकि मैन्ग्रोव की सुरक्षा केवल बस्तियों और समुद्र के बीच निर्जन क्षेत्र बनाने से प्राप्त नहीं होती है।

  • विकल्प (b) मैन्ग्रोव की एक पारिस्थितिक उपयोगिता बताता है, लेकिन यह तटीय आपदा से भौतिक सुरक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया नहीं है।

  • विकल्प (c) सही नहीं है, क्योंकि चक्रवात या सुनामी के समय ऊँचे वृक्षों के नीचे आश्रय लेना सुरक्षित नहीं होता है।

  • मैन्ग्रोव द्वारा मिलने वाली सुरक्षा उसकी पट्टी की चौड़ाई, वनस्पति के घनत्व, प्रजातियों, तटीय स्थलाकृति और आपदा की तीव्रता पर निर्भर करती है।

  • इसलिए मैन्ग्रोव प्राकृतिक सुरक्षा कवच हैं, लेकिन वे सुरक्षित निकासी और अभियांत्रिकीय तटीय सुरक्षा उपायों का पूर्ण विकल्प नहीं हैं।

  • वर्ष 2004 की हिंद महासागर सुनामी के दौरान कुछ क्षेत्रों में अक्षुण्ण मैन्ग्रोव पट्टियों के पीछे स्थित बस्तियों में अपेक्षाकृत कम क्षति देखी गई थी।

  • मैन्ग्रोव मत्स्यों और क्रस्टेशियनों को प्रजनन स्थल प्रदान करने के साथ जैव विविधता संरक्षण तथा नीले कार्बन के संचयन में भी सहायक हैं।

  • भारत के प्रमुख मैन्ग्रोव क्षेत्रों में सुंदरबन, भितरकनिका, गोदावरी–कृष्णा डेल्टा, पिचावरम, मुथुपेट तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह शामिल हैं।

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