Previous Year Question
‘ग्रीनहाउस गैस प्रोटोकॉल’ क्या है?
यह सरकार और व्यवसाय के नेतृत्वकर्ताओं के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों को समझने, परिमाण निर्धारित करने और प्रबंधित करने हेतु एक अंतरराष्ट्रीय लेखांकन साधन है।
यह विकासशील देशों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियाँ अपनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की संयुक्त राष्ट्र की एक पहल है।
यह संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों द्वारा अनुसमर्थित एक अंतर-सरकारी समझौता है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2022 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को निर्दिष्ट स्तरों तक कम करना है।
यह विश्व बैंक द्वारा आयोजित बहुपक्षीय REDD+ पहलों में से एक है।
Correct Answer: A
Detailed Solution
ग्रीनहाउस गैस प्रोटोकॉल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों के मापन, लेखांकन और रिपोर्टिंग के लिए विश्व स्तर पर प्रयुक्त मानकीकृत ढाँचा है।
इसे विश्व संसाधन संस्थान और सतत विकास के लिए विश्व व्यापार परिषद की साझेदारी में विकसित किया गया।
इसका उपयोग कंपनियाँ, नगर, संस्थान और सरकारें अपने उत्सर्जन-स्रोतों की पहचान तथा उत्सर्जन सूची तैयार करने के लिए कर सकती हैं।
यह स्वयं कोई अंतरराष्ट्रीय संधि, नियामक संस्था अथवा वित्तीय सहायता कार्यक्रम नहीं है।
प्रोटोकॉल संगठन की परिचालन और संगठनात्मक सीमाएँ निर्धारित करने तथा उत्सर्जन को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।
स्कोप 1 में किसी संगठन के स्वामित्व अथवा नियंत्रण वाले स्रोतों से होने वाले प्रत्यक्ष उत्सर्जन सम्मिलित होते हैं।
इनमें कंपनी के कारखानों में ईंधन का दहन, अपने वाहनों का उत्सर्जन और औद्योगिक प्रक्रियाओं से होने वाला प्रत्यक्ष उत्सर्जन सम्मिलित हो सकता है।
स्कोप 2 में खरीदी गई बिजली, भाप, ताप अथवा शीतलन के उत्पादन से होने वाला अप्रत्यक्ष उत्सर्जन सम्मिलित होता है।
यह उत्सर्जन ऊर्जा उत्पादक के स्थल पर होता है, लेकिन ऊर्जा का उपयोग करने वाले संगठन के लेखांकन में शामिल किया जाता है।
स्कोप 3 में संगठन की मूल्य-शृंखला से संबंधित अन्य अप्रत्यक्ष उत्सर्जन सम्मिलित होते हैं।
इनमें खरीदी गई वस्तुएँ, परिवहन, व्यावसायिक यात्राएँ, कर्मचारियों का आवागमन, अपशिष्ट और बेचे गए उत्पादों का उपयोग सम्मिलित हो सकता है।
GHG Protocol में कॉरपोरेट उत्सर्जन के अतिरिक्त परियोजनाओं, उत्पादों, नगरों, नीतियों और संपूर्ण मूल्य-शृंखला के लिए भी मानक तथा मार्गदर्शन उपलब्ध हैं।
मानकीकृत लेखांकन से संस्थाएँ आधार-वर्ष निर्धारित कर सकती हैं, उत्सर्जन-कटौती लक्ष्य बना सकती हैं और अलग-अलग वर्षों की प्रगति की तुलना कर सकती हैं।
विश्वसनीय रिपोर्टिंग के लिए प्रासंगिकता, पूर्णता, संगति, पारदर्शिता और सटीकता इसके प्रमुख लेखांकन सिद्धांत हैं।
विकल्प (b) गलत है, क्योंकि प्रोटोकॉल विकासशील देशों को वित्तीय प्रोत्साहन देने वाली संयुक्त राष्ट्र पहल नहीं है।
विकल्प (c) गलत है, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र के सभी देशों पर बाध्यकारी उत्सर्जन-कटौती लागू करने वाला अंतर-सरकारी समझौता नहीं है।
विकल्प (d) गलत है, क्योंकि यह विश्व बैंक की REDD+ पहल नहीं, बल्कि ग्रीनहाउस गैस लेखांकन और रिपोर्टिंग का ढाँचा है।