JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2017

Previous Year Question

कार्बन डाइऑक्साइड के मानवजनित उत्सर्जनों के कारण आसन्न भूमंडलीय तापन को कम करने के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-से कार्बन प्रच्छादन के संभावित स्थल हो सकते हैं?

  1. परित्यक्त और अलाभकारी कोयला संस्तर

  2. समाप्त हो चुके तेल और गैस भंडार

  3. भूमिगत गहरे लवणीय शैलसमूह

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

A.

केवल 1 और 2

B.

केवल 3

C.

केवल 1 और 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: D

Detailed Solution

  • कार्बन प्रच्छादन में कार्बन डाइऑक्साइड को वायुमंडल में जाने से रोककर लंबे समय के लिए उपयुक्त प्राकृतिक अथवा भूगर्भीय भंडार में संचित किया जाता है।

  • कार्बन कैप्चर और स्टोरेज प्रक्रिया में औद्योगिक स्रोत से CO₂ को पृथक किया जाता है, संपीडित किया जाता है और पाइपलाइन अथवा अन्य साधनों से भंडारण-स्थल तक पहुँचाया जाता है।

  • भूगर्भीय भंडारण के लिए ऐसा गहरा और सरंध्र शैल-स्तर आवश्यक होता है जिसमें CO₂ प्रवेश कर सके तथा उसके ऊपर अभेद्य कैप-रॉक हो, जो CO₂ को बाहर निकलने से रोके।

  • कथन 1 सही है: परित्यक्त और अलाभकारी कोयला संस्तरों में CO₂ का भंडारण किया जा सकता है।

  • कोयले की सतह मेथेन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड को अधिक मजबूती से अधिशोषित कर सकती है।

  • कोयला संस्तर में CO₂ प्रविष्ट कराने से वहाँ अधिशोषित मेथेन विस्थापित हो सकती है, जिसे ऊर्जा-स्रोत के रूप में निकाला जा सकता है।

  • इस प्रक्रिया को संवर्धित कोल-बेड मेथेन पुनर्प्राप्ति से जोड़ा जाता है।

  • केवल ऐसे गहरे और खनन के लिए अनुपयुक्त कोयला संस्तर उपयुक्त होते हैं जिनकी भूगर्भीय संरचना सुरक्षित भंडारण की अनुमति देती है।

  • CO₂ के कारण कोयले में प्रसार अथवा फूलना हो सकता है, जिससे उसकी पारगम्यता कम होकर प्रविष्टि कठिन हो सकती है।

  • कथन 2 सही है: समाप्त हो चुके तेल और गैस भंडार कार्बन डाइऑक्साइड के संभावित भंडारण-स्थल हैं।

  • इन भंडारों ने लाखों वर्षों तक तेल और गैस को रोके रखा था; इसलिए वहाँ उपयुक्त सरंध्र चट्टान और अभेद्य आवरण की उपस्थिति पहले से प्रमाणित होती है।

  • इनके भूगर्भीय ढाँचे, कुओं और उत्पादन इतिहास के बारे में अपेक्षाकृत अधिक जानकारी उपलब्ध होती है।

  • CO₂ को कुछ तेल क्षेत्रों में प्रविष्ट कराकर शेष तेल को बाहर निकालने में भी सहायता ली जा सकती है, जिसे संवर्धित तेल पुनर्प्राप्ति कहा जाता है।

  • पुराने अथवा अनुचित रूप से बंद कुएँ CO₂ रिसाव का मार्ग बन सकते हैं, इसलिए उनकी जाँच और सीलिंग आवश्यक है।

  • कथन 3 सही है: भूमिगत गहरे लवणीय शैलसमूह कार्बन भंडारण की सबसे अधिक संभावित क्षमता वाले भूगर्भीय स्थलों में माने जाते हैं।

  • इनमें सरंध्र चट्टानों के भीतर ऐसा अत्यधिक लवणीय जल होता है जो सामान्यतः पेयजल अथवा सिंचाई के लिए उपयुक्त नहीं होता।

  • CO₂ को गहराई में प्रविष्ट कराने पर उसका कुछ भाग शैल के छिद्रों में फँसता है, कुछ लवणीय जल में घुलता है और कुछ समय के साथ खनिजों से अभिक्रिया करके स्थायी कार्बोनेट बना सकता है।

  • सुरक्षित भंडारण के लिए स्थल-चयन, रिसाव की निगरानी, भू-दाब, प्रेरित भूकंपीयता और लवणीय जल के विस्थापन का मूल्यांकन आवश्यक है।

  • अतः परित्यक्त कोयला संस्तर, समाप्त तेल-गैस भंडार और गहरे लवणीय शैलसमूह—तीनों कार्बन प्रच्छादन के संभावित स्थल हैं।

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